FATF की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले पाकिस्तान ने मसूद अजहर को लेकर एक बार फिर बड़ा ऐलान किया है। FIA की नई रेड बुक में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का नाम शामिल करते हुए 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। लेकिन इस कदम से पाकिस्तान सवालों के घेरे में आ गया है। हर बार इनाम की रकम बढ़ाने के बजाय मसूद अजहर की गिरफ्तारी क्यों नहीं होती? क्या यह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई है या FATF के दबाव में किया गया महज दिखावटी स्टंट?
कौन है मसूद अजहर?
मसूद अजहर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और सरगना है। उसने साल 2000 में इस संगठन की स्थापना की थी। भारत में संसद हमला, पठानकोट एयरबेस हमला और पुलवामा हमले जैसे आतंकी मामलों में जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया है।
1999 में IC-814 विमान हाईजैक के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत ने मसूद अजहर को रिहा किया था। इसके बाद वह पाकिस्तान पहुंचा और जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया।
क्या काम करता है FATF?
FATF यानी Financial Action Task Force एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने के लिए वैश्विक मानक तय करती है। इसकी स्थापना 1989 में पेरिस में G-7 देशों की पहल पर हुई थी और इसका मुख्यालय भी पेरिस में है।
शुरुआत में FATF का फोकस मनी लॉन्ड्रिंग पर था, लेकिन 2001 के 9/11 हमलों के बाद आतंकवाद के वित्तपोषण को भी इसके दायरे में शामिल किया गया। FATF देशों की वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा करता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है।
क्यों नहीं की जा रही मसूद अजहर की गिरफ्तारी?
साल 2021 में भी पाकिस्तान ने मसूद अजहर के खिलाफ 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान दावा करता रहा है कि मसूद अजहर देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान में हो सकता है। हालांकि, तालिबान ने भी उसके अफगानिस्तान में होने के दावे को खारिज किया है।
वहीं, आलोचकों का आरोप है कि मसूद अजहर को भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर के लिए रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देखा जाता रहा है। इसी वजह से पाकिस्तान पर उसे संरक्षण देने और उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई से बचने के आरोप लगते रहे हैं।
मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने का पाकिस्तान का यह कदम FATF की प्लीनरी से पहले जरूर बड़ा दिख रहा है, लेकिन असली सवाल कार्रवाई का है। अगर पाकिस्तान वाकई आतंकवाद के खिलाफ गंभीर है, तो सिर्फ इनाम की रकम बढ़ाने के बजाय मसूद अजहर के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? आखिर पाकिस्तान कब तक ऐसे दिखावटी स्टंट करता रहेगा और मसूद अजहर की गिरफ्तारी कब होगी? FATF की बैठक में अब इसी पर सबकी नजर रहेगी।