नई दिल्ली। केंद्र सरकार के करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। वेतन आयोग फिलहाल सभी हितधारकों (Stakeholders) के साथ गहन विचार-विमर्श कर रहा है।
इस पूरी कवायद में सबसे बड़ा गेम-चेंजर ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) साबित होने वाला है। यही वह पैमाना है जो तय करेगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी (Take-home Salary) में कितना इजाफा होगा।
कर्मचारी यूनियनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 2 से 5 गुना तक बढ़ाने की मांग की जा रही है, जबकि सरकार इसके वित्तीय बोझ और बजटीय क्षमता का आकलन कर रही है।
फिटमेंट फैक्टर का गणित: पे-लेवल 4 के उदाहरण से समझें
मल्टीप्लायर (फिटमेंट फैक्टर) में मामूली बदलाव भी हर पे-लेवल के कर्मचारियों की सैलरी को बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है। यदि हम पे-लेवल 4 के एक कर्मचारी की बात करें, जिसकी मौजूदा बेसिक पे 25,500 रुपये है, तो अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर मूल वेतन का परिदृश्य कुछ ऐसा होगा..
| फिटमेंट फैक्टर (संभावित) | संशोधित नई बेसिक पे (मूल वेतन) |
| 2 गुना होने पर | $25,500 \times 2 = \textbf{51,000}$ रुपये |
| 2.5 गुना होने पर | $25,500 \times 2.5 = \textbf{63,750}$ रुपये |
| 3 गुना होने पर | $25,500 \times 3 = \textbf{76,500}$ रुपये |
नोट: ये आंकड़े फिलहाल सांकेतिक (Indicative) हैं। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही साफ होगा।
बेसिक पे बढ़ते ही रॉकेट की तरह भागेगा HRA भत्ता
सैलरी स्ट्रक्चर में फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मकान किराया भत्ता (HRA) पर लागू नहीं होता, लेकिन यह उस आधार (बेसिक पे) को बढ़ा देता है जिससे HRA की गणना की जाती है। 7वें वेतन आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार, HRA की दरें शहरों की कैटेगरी (X, Y और Z) पर निर्भर करती हैं।
यदि सरकार 2 गुना फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है और बेसिक पे 51,000 रुपये होती है, तो मौजूदा 30%, 20% और 10% के स्लैब के आधार पर HRA का नया ढांचा इस प्रकार होगा:
- X कैटेगरी शहर (30% HRA): 15,300 रुपये प्रति माह (मेट्रो शहरों के लिए)
- Y कैटेगरी शहर (20% HRA): 10,200 रुपये प्रति माह
- Z कैटेगरी शहर (10% HRA): 5,100 रुपये प्रति माह
आर्थिक विश्लेषकों और बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, बेसिक पे में होने वाली इस बढ़ोतरी का सीधा और सकारात्मक असर कर्मचारियों की बचत, निवेश क्षमता और क्रय शक्ति (Purchasing Power) पर पड़ेगा, जिससे बाजार में भी नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।