कार्तिक मास आते ही हर घर में दिवाली की भव्य तैयारियाँ और साफ-सफाई का दौर शुरू हो जाता है। 6 नवंबर (शुक्रवार) को धनतेरस और 8 नवंबर (रविवार) को दिवाली का महापर्व मनाया जाएगा। ऐसे में धोए जाने वाले पर्दे, पोंछे जाने वाले पंखे और घर के कोने-कोने को चमकाने की लंबी लिस्ट तैयार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किचन, बालकनी या सबसे गंदे दिख रहे कमरे से सफाई शुरू करना वास्तु शास्त्र के लिहाज से बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है? वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर में तीन ऐसी बेहद खास और पवित्र जगहें हैं, जिनकी सफाई सबसे पहले होना बहुत जरूरी है, वरना मां लक्ष्मी का आगमन बाधित हो सकता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार दिवाली की सफाई की सही शुरुआत और उन 3 सबसे महत्वपूर्ण जगहों के बारे में।
सबसे पहले उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा पर दें ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिवाली की साफ-सफाई की शुरुआत हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा से ही करनी चाहिए।
ईशान कोण का महत्व: वास्तु में उत्तर-पूर्व दिशा को ‘ईशान कोण’ माना जाता है। इसके शासक देवता स्वयं भगवान शिव का रूप ‘ईशान’ हैं और इसका मुख्य तत्व जल है। इसे घर का सबसे पवित्र क्षेत्र माना जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार: सुबह की पहली धूप (पूर्व) और उत्तर से आने वाली ठंडी व स्थिर ऊर्जा का मिलन इसी कोने में होता है। इसलिए पूजा कक्ष, ध्यान कक्ष या जल भंडारण इसी दिशा में होना शुभ होता है।
गंदगी का दुष्प्रभाव: यदि उत्तर-पूर्व दिशा अस्त-व्यस्त, अंधेरी या गंदी रहती है, तो पूरे घर में शुभ ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। इससे परिवार में मानसिक बेचैनी, निर्णयों में देरी और स्वास्थ्य संबंधी रुकावटें आती हैं।
साफ-सफाई का नियम: दिवाली से पहले इस जगह को पूरी तरह साफ और खाली कर दें। यहाँ पुराने अखबार, गत्ते के डिब्बे, शू-रैक, कूड़ादान या टूटा-फूटा सामान भूलकर भी न रखें। यदि यहाँ कोई भारी अलमारी रखी है, तो उसे दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में शिफ्ट कर दें।
घर के मुख्य द्वार की सफाई
दिवाली से पहले घर के मुख्य द्वार की सफाई करना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। इसे मानव शरीर के हृदय की तरह महत्वपूर्ण माना गया है।
मान्यता है कि मुख्य द्वार को साफ, सुंदर और बाधा-मुक्त रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दिवाली पर मां लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए उत्तर-पूर्व दिशा की सफाई के बाद मुख्य द्वार की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उत्तर दिशा (कुबेर देव का स्थान)
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर की उत्तर दिशा को आर्थिक समृद्धि और धन-धान्य का प्रमुख स्थान माना जाता है। इस दिशा के स्वामी धन के देवता कुबेर हैं, इसलिए इसका संबंध आर्थिक उन्नति और करियर की सफलता से जोड़ा जाता है।
दिवाली से पहले उत्तर दिशा की अच्छी तरह सफाई करें और यहां रखा पुराना कबाड़, टूटे बर्तन व बेकार सामान हटा दें। इस दिशा में पर्याप्त रोशनी और स्वच्छता बनाए रखें। साथ ही, तिजोरी, नकदी बॉक्स और जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
दिवाली की सफाई केवल घर को चमकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार सही दिशा से शुरुआत करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ईशान कोण, मुख्य द्वार और उत्तर दिशा की साफ-सफाई करके घर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाएं। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर तैयार होता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी वास्तु शास्त्र की मान्यताओं और पारंपरिक धारणाओं पर आधारित है। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।