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क्या AI सच में नौकरियां खत्म कर देगा? नई स्टडी में बड़ा खुलासा, इन तरह के पेशों पर अभी भी कोई आंच नहीं

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर यह चर्चा तेज है कि यह आने वाले समय में लाखों नौकरियों को बदल सकता है। लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि फिलहाल वास्तविकता इससे काफी अलग है। AI टूल्स तेजी से ऑफिस और कंपनियों में इस्तेमाल हो रहे हैं, फिर भी ज्यादातर पेशों में उनका असर अभी सीमित ही दिखाई दे रहा है।
AI कंपनी Anthropic की तरफ से जारी एक नए अध्ययन में बताया गया है कि AI की सैद्धांतिक क्षमता और असल कामों में उसके उपयोग के बीच अभी बड़ा अंतर मौजूद है। यह रिपोर्ट कंपनी के AI मॉडल Claude के लाखों पेशेवर उपयोगकर्ताओं के डेटा के आधार पर तैयार की गई है।

सैद्धांतिक क्षमता ज्यादा, असली उपयोग कम

रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसे काम हैं जिन्हें तकनीकी रूप से AI कर सकता है, लेकिन व्यवहार में अभी उनका छोटा हिस्सा ही AI से कराया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर कंप्यूटर और गणित से जुड़े पेशों में लगभग 94 प्रतिशत काम ऐसे हैं जिन्हें सिद्धांत रूप में AI ऑटोमेट कर सकता है। लेकिन वास्तविकता में अभी सिर्फ करीब 33 प्रतिशत कामों में ही AI का उपयोग हो रहा है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो क्लॉड के जरिए किए जा रहे 68 प्रतिशत काम ऐसे हैं जिन्हें AI आसानी से संभाल सकता है, जबकि सिर्फ 3 प्रतिशत काम ऐसे हैं जिन्हें फिलहाल AI के लिए असंभव माना जाता है। इस अंतर से साफ है कि AI की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं, लेकिन उनका वास्तविक इस्तेमाल अभी शुरुआती चरण में है।

किन नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ पेशे ऐसे हैं जहां AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इनमें कंप्यूटर प्रोग्रामर सबसे ऊपर हैं, जहां करीब 75 प्रतिशत कामों में AI की मदद ली जा रही है। इसके बाद ग्राहक सेवा प्रतिनिधि और डेटा एंट्री ऑपरेटर जैसे पेशे आते हैं, जहां लगभग 67 प्रतिशत कार्यों में AI का उपयोग देखने को मिला है।
इन क्षेत्रों में कोडिंग, डेटा प्रोसेसिंग, और API इंटीग्रेशन जैसे काम AI की मदद से काफी तेजी से किए जा रहे हैं। यही वजह है कि टेक और डिजिटल सेक्टर में AI का प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है।

कई पेशे अभी भी AI से सुरक्षित

दूसरी तरफ कई ऐसे पेशे हैं जहां AI का असर लगभग शून्य है। जैसे रसोइये, मोटरसाइकिल मैकेनिक, लाइफगार्ड, बारटेंडर और डिशवॉशर जैसे काम, जिनमें शारीरिक श्रम और वास्तविक दुनिया में काम करना जरूरी होता है। इन पेशों में फिलहाल AI की कोई खास भूमिका नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 30 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे पेशों में काम कर रहे हैं जहां AI का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हो रहा।

रोजगार पर फिलहाल बड़ा असर नहीं

AI को लेकर अक्सर यह चिंता जताई जाती है कि इससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ सकती है। लेकिन इस अध्ययन के अनुसार जिन क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ा है, वहां अभी तक बेरोजगारी में कोई बड़ा उछाल नहीं देखा गया है।
हालांकि एक दिलचस्प ट्रेंड जरूर सामने आया है। 2022 के अंत से 22 से 25 साल के युवा कर्मचारियों की भर्ती में लगभग 14 प्रतिशत की कमी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब शुरुआती स्तर के कुछ काम AI से कराने लगी हैं, जिसकी वजह से नए युवाओं की भर्ती थोड़ी कम हो सकती है।
अमेरिका के U.S. Bureau of Labor Statistics के अनुमान के मुताबिक अगर किसी पेशे में AI कवरेज 10 प्रतिशत बढ़ता है तो उस पेशे की रोजगार वृद्धि लगभग 0.6 प्रतिशत कम हो सकती है।

किन लोगों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जिन पेशों पर AI का ज्यादा असर पड़ रहा है, उनमें काम करने वाले लोग अक्सर ज्यादा पढ़े-लिखे और ज्यादा वेतन पाने वाले होते हैं। ऐसे पेशों में महिलाओं की हिस्सेदारी भी औसतन 16 प्रतिशत ज्यादा पाई गई।
इसके अलावा स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले कर्मचारियों का अनुपात भी इन क्षेत्रों में काफी अधिक है। साथ ही इन पेशों में श्वेत और एशियाई मूल के कर्मचारियों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखी गई।

AI अभी अपनी पूरी क्षमता से दूर

अध्ययन के लेखकों का कहना है कि AI की असली क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। उनके अनुसार तकनीकी रूप से AI बहुत सारे काम कर सकता है, लेकिन वास्तविक दुनिया में उसका उपयोग धीरे-धीरे ही बढ़ रहा है।
यह अध्ययन O*NET के कार्य डेटा, क्लॉड के उपयोग पैटर्न और 2023 के एक प्रसिद्ध शोध को जोड़कर तैयार किया गया है। इसमें उन कार्यों को अलग-अलग मापा गया है जिन्हें AI पूरी तरह कर सकता है और जिनमें वह केवल सहायक भूमिका निभाता है।

नीति और भविष्य के लिए अहम संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, कंपनियों और कर्मचारियों को यह समझने में मदद करेगी कि AI का वास्तविक असर अभी कितना है और आने वाले समय में किस तरह बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे AI टूल्स का उपयोग बढ़ेगा और ज्यादा डेटा उपलब्ध होगा, वैसे-वैसे AI की कवरेज भी बढ़ सकती है। फिलहाल हालांकि इसका प्रभाव असमान और सीमित ही नजर आता है।

news desk

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