पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में सोशल मीडिया ने एक बेहद अहम और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ज़माना बदल चुका है, और अब जनता सिर्फ टीवी के स्टूडियो डिबेट्स से हट कर कांग्रेस पार्टी और खुद राहुल गांधी लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चाहे वह एक्स हो, फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब के ज़रिए सीधे आम जनता से जुड़ रहे हैं। उनके बयान और पोस्ट्स लगातार ट्रेंड करते है।
लेकिन जो सबसे ज़्यादा दिलचस्प और हैरान वाली बात है, वो है राहुल गाँधी का Spotify पर “पॉडकास्ट शो” जिसका नाम ‘राहुल गांधी पॉडकास्ट ऑन स्पॉइटी’ है इसके ज़रिए वह सीधे देश के युवाओं और आम जनता से जुड़ रहे हैं।
भारत में कुल Spotify यूजर्स लगभग 77 से 80 करोड़ है, जिसमे Gen-Z युवा आबादी करीब 40 से 50 करोड़ के आसपास है। जो ओटीटी, म्यूजिक और पॉडकास्ट की दुनिया में सबसे ज़्यादा एक्टिव रहते हैं। संसद के अंदर मुद्दों पर सवाल पूछते हुए माइक बंद कर देना या टीवी चैनलों के छोटे और कटे-छटे साउंडबाइट्स, राहुल गांधी ने इन सब को पीछे छोड़ते हुए स्पॉइटी के ज़रिए अपनी आवाज़ सीधे उन करोड़ों लोगों तक पहुंचा दी है जो आज के डिजिटल युग के असली वोटर और भविष्य हैं। यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी उन्हें अपना ‘Gen-Z फेवरेट लीडर’ मानकर उनके इस नए और एक्सेसिबल फॉर्मेट की चर्चा कर रही है।
इन मुद्दों के साथ ट्रेंड कर रहा है पॉडकास्ट
इस पॉडकास्ट सीरीज़ में सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि देश के गंभीर मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ गहरी और बेबाक चर्चाएं हो रही हैं:
अंडमान-निकोबार और पर्यावरण: इस पॉडकास्ट में उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के नाज़ुक कोरल रीफ्स (प्रवाल भित्तियों), जंगलों और स्थानीय पारिस्थितिकी पर वैज्ञानिकों के साथ गंभीर चर्चा की है कि कैसे विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
युवा, छात्र आंदोलन और शिक्षा: देश के युवाओं के संघर्ष, पेपर लीक की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था की कमियों और विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने बिना किसी फिल्टर के अपनी बात रखी है।
कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका और दृष्टिकोण: देश के मौजूदा हालात, संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए पार्टी की क्या भूमिका है, इसका पूरा विज़न इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखा गया है।
पारंपरिक राजनीति के तौर-तरीकों से परे जाकर राहुल गांधी का स्पॉइटी पर इस अंदाज़ में उतरना यह साबित करता है कि अब सियासत सिर्फ रैलियों तक सीमित नहीं है। 40-50 करोड़ Gen-Z युवाओं और 77-80 करोड़ स्पॉइटी यूजर्स के इस विशाल डिजिटल दायरे में यह पॉडकास्ट महज़ सुनने का साधन नहीं, बल्कि देश की समस्याओं पर सीधे संवाद स्थापित करने का एक बहुत बड़ा हथियार बन चुका है।