अहमदाबाद: भाप और कोयले से शुरू हुआ भारतीय रेलवे का सफर डीजल और बिजली से होते हुए अब वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के बाद देश में पहली बार लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी से ट्रेन चलाने की तैयारी है। 27 अक्टूबर को देश की पहली एलएनजी ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह इस ट्रेन को रवाना करेंगे।
साबरमती से शुरू होगी देश की पहली LNG ट्रेन
देश की पहली एलएनजी ट्रेन गुजरात के साबरमती स्टेशन से रवाना होगी। रेलवे पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कारों में एलएनजी आधारित ईंधन प्रणाली का इस्तेमाल करने जा रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि एक ही इंजन को एलएनजी और डीजल, दोनों ईंधनों से चलाया जा सकता है।
ईंधन की उपलब्धता के आधार पर इंजन एलएनजी या डीजल का इस्तेमाल करेगा। इस तरह ट्रेन के संचालन में केवल एक ही ईंधन पर निर्भरता नहीं रहेगी।
डीजल की खपत 40 फीसदी तक घटेगी
रेलवे में एलएनजी के इस्तेमाल से डीजल पर निर्भरता करीब 40 फीसदी तक कम होने का अनुमान है। एलएनजी की कीमत डीजल के मुकाबले कम होने के कारण रेलवे को हर साल करीब 24 लाख रुपये की बचत होगी।
इसके साथ ही रेलवे को ऊर्जा के एक वैकल्पिक स्रोत का विकल्प भी मिलेगा। इस ट्रेन में 1400 हॉर्स पावर क्षमता का इंजन लगाया गया है। ट्रेन को शुरू करने से पहले 2000 किलोमीटर तक चलाकर इसका परीक्षण पूरा किया गया है।
LNG खत्म हुई तो अपने आप डीजल पर शिफ्ट होगा इंजन
एलएनजी ट्रेन के इंजन को दोहरे ईंधन वाली तकनीक के आधार पर तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि ट्रेन जरूरत के हिसाब से एलएनजी और डीजल, दोनों पर चल सकती है।
इंजन एलएनजी और डीजल के बीच अपने आप बदलाव कर सकेगा। लंबी दूरी के सफर के दौरान अगर एलएनजी खत्म हो जाती है तो इंजन स्वतः डीजल पर चला जाएगा। इससे ट्रेन के संचालन में रुकावट की आशंका कम होगी और डीजल पर निर्भरता भी घटेगी।
2200 लीटर का LNG टैंक, एक बार में 222 किमी का सफर
एलएनजी ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार में 2200 लीटर क्षमता का एलएनजी टैंक लगाया गया है। पूरी तरह ईंधन भरने के बाद ट्रेन 222 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।
ट्रेन को एलएनजी आधारित संचालन के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसका इंजन दोहरे ईंधन वाली प्रणाली पर काम करता है। जरूरत पड़ने पर यह एलएनजी से डीजल पर और डीजल से एलएनजी पर स्विच कर सकता है।
ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण घटाने पर भी जोर
एलएनजी आधारित संचालन से ट्रेन में डीजल की खपत को करीब 40 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य है। इससे रेलवे की डीजल पर निर्भरता घटेगी और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
रेलवे के मुताबिक, एलएनजी के इस्तेमाल से हर साल करीब 24 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है। इसके साथ ही यह व्यवस्था कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद कर सकती है।