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होर्मुज के बाद सऊदी की तेल पाइपलाइन भी बंद! 70 लाख बैरल रोज की सप्लाई पर संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत की बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता और गहरा गई है। होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए संकट के बाद अब ड्रोन हमलों के चलते सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन बंद करने का फैसला किया है। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल उत्पादक क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। ऐसे में इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है और भारत की चिंता भी बढ़ गई है।

सऊदी ने क्यों बंद की तेल की अहम पाइपलाइन?

ड्रोन हमलों के लगातार बढ़ते खतरे के बीच सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित तेल उत्पादक क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।

होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल की आवाजाही प्रभावित होने के बाद यही पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बिना होर्मुज से गुजरे तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता बनी हुई थी। लगातार हो रहे हमलों के बीच इसकी सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के कारण सऊदी अरब ने इसे बंद करने का फैसला किया है।

हर दिन 70 लाख बैरल तेल पहुंचाने की क्षमता

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी क्षमता करीब 70 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन पहुंचाने की है। साल 1980 में तैयार की गई यह पाइपलाइन होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सप्लाई बाधित होने की स्थिति में सऊदी तेल को वैकल्पिक रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद करती रही है।

अब इसके बंद होने से तेल आपूर्ति के उस वैकल्पिक रास्ते पर भी संकट खड़ा हो गया है, जो होर्मुज से बचकर सऊदी अरब के कच्चे तेल को बाहर पहुंचाने में सक्षम था।

क्या 100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल?

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में सऊदी अरब की पाइपलाइन बंद होने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।

अगर सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने की आशंका है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करते हैं।

भारत पर क्यों बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की टेंशन?

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए भी चिंता का कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर घरेलू तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़े संकट और सऊदी अरब की प्रमुख पाइपलाइन के बंद होने से भारत की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति पर बनी रहेगी।

vineet verma

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