लखनऊ: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। बुलंदशहर में प्रस्तावित रैली रद्द होने के बाद अब पार्टी इस महीने के अंत से पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू करने की तैयारी में है। सपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि अखिलेश यादव का बुलंदशहर दौरा नए कार्यक्रम के तहत होगा और इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों का दौरा किया जाएगा।
राजेंद्र चौधरी के मुताबिक, महीने के बाद अखिलेश यादव बुलंदशहर जाएंगे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर जिले में पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि सहारनपुर को भी उचित समय पर इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
अखिलेश यादव की बुलंदशहर यात्रा के दौरान स्थानीय प्रशासन ने तय स्थान पर उनके हेलिकॉप्टर की लैंडिंग की अनुमति नहीं दी थी। प्रशासन की ओर से इसके पीछे लैंडिंग स्थल पर पानी जमा होने का कारण बताया गया था। इसके बाद सपा ने रैली स्थगित कर दी।
हालांकि, पार्टी ने प्रशासन की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। सपा का आरोप है कि पानी जमा होने की बात महज बहाना थी और हेलिकॉप्टर उतारने की अनुमति न देने के पीछे भाजपा सरकार का दबाव था।
राजेंद्र चौधरी ने भी प्रशासन के दावे को खारिज करते हुए इसे भाजपा की शरारत बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस घटना से पीछे नहीं हटेगी और अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव से पहले पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे।
अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकार वार्ता के दौरान बुलंदशहर पुलिस लाइन्स का एक वीडियो भी दिखाया था। इसी स्थान पर उनके हेलिकॉप्टर की लैंडिंग प्रस्तावित थी। अखिलेश ने दावा किया था कि वीडियो में वहां पानी भरा हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने प्रशासन की दलील पर सवाल उठाते हुए तंज कसा था कि ऐसा लग रहा है जैसे वहां बाढ़ आ गई हो और उन्हें नाव से जाना पड़ेगा।
जब राजेंद्र चौधरी से पूछा गया कि अगर दूसरे जिलों में भी स्थानीय प्रशासन अखिलेश यादव के दौरे या हेलिकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति देने से इनकार करता है तो पार्टी क्या करेगी, तो उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी। उनका कहना था कि जनता सब कुछ देख और समझ रही है और सही समय आने पर भाजपा को जवाब देगी।
बुलंदशहर में प्रस्तावित कार्यक्रम पार्टी कार्यकर्ताओं के एक आयोजन के लिए तय किया गया था। लेकिन हेलिकॉप्टर लैंडिंग को लेकर हुआ विवाद अब व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम और किसान समुदाय की बड़ी मौजूदगी है और यह क्षेत्र लंबे समय से अहम चुनावी मैदान रहा है। ऐसे में सपा की प्रस्तावित रैली श्रृंखला के जरिए इन सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी के संभावित कार्यक्रम में सहारनपुर को भी शामिल किया जा सकता है। हाल में कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने के बाद यह जिला राजनीतिक और कानूनी विवाद का केंद्र रहा है।
अखिलेश यादव भाजपा पर सांप्रदायिक मुद्दों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी राजनीति के जरिए महंगाई, बेरोजगारी और आम लोगों से जुड़े दूसरे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जाती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा के नए फोकस को राष्ट्रीय लोक दल के साथ बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रालोद पहले समाजवादी पार्टी की सहयोगी थी, लेकिन अब वह भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में पश्चिमी यूपी में सपा की सक्रियता आने वाले चुनावी मुकाबले में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकती है।
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