नई दिल्ली: देश में 100 फीसदी एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं, लेकिन इनके लिए पर्याप्त ईंधन की व्यवस्था कैसे होगी? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यही अहम सवाल पूछा है। एथेनॉल आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने ईंधन की उपलब्धता के साथ उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर भी चिंता जताई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल नीति पर विचार करते समय पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव की जरूरत होगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर 100 फीसदी एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी जाती है, तो उनकी जरूरत के मुताबिक ईंधन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी। अदालत का सवाल इस बात पर केंद्रित था कि नए ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति देने के साथ उसकी उपलब्धता के लिए जरूरी व्यवस्था भी तैयार है या नहीं।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए विनिर्माण व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव करने होंगे। सुनवाई के दौरान ईंधन की उपलब्धता और उससे जुड़े व्यापक नीतिगत पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसमें फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन को भी शामिल किया गया है। E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग शुद्ध एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। इसे केवल ऐसे वाहनों में उपयोग किया जा सकता है, जिन्हें इसके अनुकूल बनाया गया हो।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर E85 ईंधन में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
हालांकि, E100 को नियमों के तहत मंजूरी मिलने का यह मतलब नहीं है कि यह ईंधन देशभर के पेट्रोल पंपों पर तत्काल उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता, वितरण व्यवस्था और आपूर्ति तंत्र विकसित करना भी जरूरी होगा। यही वजह है कि इस ईंधन पर चलने वाले वाहनों को अनुमति देने के साथ इसकी उपलब्धता का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है।
भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना, ईंधन आयात पर होने वाले खर्च को घटाना और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
ऐसे में एक तरफ E100 ईंधन पर चलने वाले वाहनों को अनुमति देने की व्यवस्था और दूसरी तरफ पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा को 20 प्रतिशत पर बनाए रखने की नीति के बीच तालमेल का सवाल उठ रहा है। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि उपलब्ध उत्पादन क्षमता और वितरण व्यवस्था नई जरूरतों को पूरा करने के लिए कितनी तैयार है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एथेनॉल से जुड़े इस मामले को केवल ईंधन की उपलब्धता तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें व्यापक जनहित, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश ने किसानों को सशक्त बनाने के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के हितों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसानों को सशक्त बनाने से जुड़ा पहलू ऐसा है, जिस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।
अटॉर्नी जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों को भी उठाएंगे। सुनवाई में एक वकील ने कहा कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी रूप में फायदा मिल सकता है। वहीं, एक अन्य वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार की नीति में किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। 30 जून को अदालत ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था, जो एथेनॉल का कोटा बढ़ाने से जुड़ा था।
यह मामला एक तेल विपणन कंपनी की याचिका से संबंधित है। कंपनी का कहना था कि हाई कोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर सकता है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को एक एथेनॉल निर्माता की आवंटन बढ़ाने की मांग पर विचार करके फैसला लेने का निर्देश दिया था। निर्माता ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए अपने आवंटन में बढ़ोतरी की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी नियमों और दीर्घकालिक समझौतों के तहत तेल विपणन कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए बाध्य कारखानों को प्राथमिकता मिलने के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट में अगले महीने होने वाली सुनवाई में एथेनॉल आवंटन, राष्ट्रीय मिश्रण नीति, उत्पादन क्षमता, ईंधन की उपलब्धता और किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार किया जाएगा।
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