रांची: दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के बाद अब झारखंड में भी बड़ा स्टूडेंट मूवमेंट खड़ा होता नजर आ रहा है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर रांची में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि करीब 5 हजार से अधिक छात्र राजधानी रांची में जुट चुके हैं और आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है।
JPSC-JSSC विवाद ने पकड़ा आंदोलन का रूप
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जुटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए जवाब से वे संतुष्ट नहीं हैं।
राज्यभर से रांची पहुंचे हजारों छात्र
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के मुताबिक, झारखंड के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थी रांची पहुंचे हैं। हजारीबाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
‘दिल्ली के आंदोलन से मिली प्रेरणा’
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने बताया कि दिल्ली में नीट पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन से उन्हें प्रेरणा मिली। उनके अनुसार, 25 जुलाई से शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े स्टूडेंट मूवमेंट में बदल चुका है, जिसे विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों का समर्थन मिल रहा है।
चंदा जुटाकर आंदोलन चला रहे छात्र
आंदोलन में शामिल कई छात्र अपने स्तर पर आर्थिक सहयोग भी जुटा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रांची पहुंचने और आंदोलन को जारी रखने के लिए छात्र आपस में चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। कुछ छात्रों ने बताया कि रास्ते में रोके जाने के बावजूद वे दूसरे माध्यमों से रांची पहुंचे ताकि आंदोलन में शामिल हो सकें।
पोस्टरों में दिखा सरकार पर तंज
प्रदर्शन स्थल पर कई पोस्टर और बैनर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। एक पोस्टर में JPSC को ‘झोल-झाल पब्लिक सर्विस कमीशन’ बताया गया, जबकि दूसरे पोस्टर पर लिखा था, “जब केंद्र में 56 इंच वाले को झुकना पड़ा, तो राज्य में 56 सीट वाले को भी झुकना पड़ेगा।”
29 जुलाई के बाद आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
शुरुआत में अलग-अलग जिलों तक सीमित यह विरोध 29 जुलाई को “महा आंदोलन” और संविधान मार्च के आह्वान के बाद राज्यव्यापी अभियान में बदल गया। इसके बाद विभिन्न जिलों से हजारों छात्र रांची पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए।
छात्र संगठनों से लेकर अभिभावकों तक का समर्थन
आंदोलन में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल सोसायटी के सदस्य और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े शिक्षक भी शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर हर दिन राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। यहां बिरसा मुंडा, डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। लोगों की ओर से प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पानी, रेनकोट और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि राज्य गठन के बाद से भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद लगातार सामने आते रहे हैं और अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
आंदोलन के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
छात्रों के बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।