नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब ने पहली बार अमेरिका के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया गुट पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के ठिकानों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया है। हमले में PMF के लड़ाकों के साथ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सदस्यों के भी मारे जाने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर PMF क्या है, यह कितना ताकतवर है और इसे निशाना क्यों बनाया गया।
सऊदी अरब ने इराक में PMF के कथित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और हथियारों के भंडारों पर हवाई हमले किए। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अमेरिका के साथ संयुक्त अभियान के तहत की गई। माना जा रहा है कि हाल में सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों के बाद यह सैन्य अभियान शुरू किया गया।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इस संयुक्त अभियान में इराक के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें IRGC के कम से कम चार सदस्यों की मौत हुई। मृतकों की पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मोर्तेजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरौश के रूप में बताई गई है।
वहीं, एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया कि तकनीकी विशेषज्ञों और IRGC से जुड़े करीब 20 ईरानी सलाहकार भी इस कार्रवाई में मारे गए।
पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज ने कहा कि बगदाद, दियाला, किरकुक और बसरा समेत इराक के सात प्रांतों में उसके कम से कम 20 सदस्य मारे गए और 32 अन्य घायल हुए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी पुष्टि की कि संयुक्त अभियान के दौरान पूर्वी इराक में लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई 72 घंटे के भीतर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।
इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई को “अस्वीकार्य आक्रामकता” बताया। परिषद का कहना है कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब इराकी अधिकारी सुरक्षा हालात को लेकर अमेरिका और सऊदी अरब के साथ बातचीत कर रहे थे।
पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF), जिसे ‘अल-हशद अल-शाबी’ भी कहा जाता है, का गठन जून 2014 में हुआ था। उस समय आतंकी संगठन ISIS ने मोसुल पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ग्रैंड अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी ने फतवा जारी किया और विभिन्न मिलिशिया समूहों को एकजुट कर PMF का गठन किया गया।
शुरुआत में इस संगठन में 50 से 70 अलग-अलग मिलिशिया समूह शामिल हुए थे।
वर्ष 2016 में इराकी संसद ने कानून पारित कर PMF को औपचारिक रूप से सरकारी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बना दिया। इसके बाद इसे स्वतंत्र सैन्य इकाई का दर्जा मिला और इराकी सशस्त्र बलों में शामिल किया गया।
ISIS के खिलाफ अभियान में PMF की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
PMF के कई प्रभावशाली गुटों के ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से करीबी संबंध बताए जाते हैं। इन गुटों को गाजा में हमास, लेबनान में हिज्बुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों के साथ ईरान समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का हिस्सा माना जाता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 में PMF के पास करीब 60 हजार लड़ाके थे। समय के साथ इसकी ताकत बढ़कर करीब 2 लाख 38 हजार लड़ाकों तक पहुंच गई है। बताया जाता है कि इराक की सुरक्षा व्यवस्था में PMF की हिस्सेदारी लगभग 16.5 प्रतिशत है, जिससे देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में उसका प्रभाव काफी बढ़ गया है।
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