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यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को सऊदी अरब के कई इलाकों में इमरजेंसी चेतावनी जारी की गई। जेद्दा, ताइफ, आभा, जाजान, अल-उला और यान्बू समेत छह इलाकों में लोगों को संभावित खतरे से सतर्क किया गया। मक्का क्षेत्र में भी चेतावनी जारी होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने अपने नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए कई इलाकों में अलर्ट जारी किया। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की।
लोगों को खिड़कियों, दरवाजों, बालकनी और छतों से दूर रहने की सलाह दी गई। प्रशासन ने यह भी कहा कि लोग अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी आपात स्थिति में केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही आधार बनाएं।
इस पूरे घटनाक्रम में मक्का क्षेत्र का नाम सामने आने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मक्का शहर पर सीधे मिसाइल या ड्रोन हमला हुआ था। यहां जारी चेतावनी संभावित खतरे को लेकर थी।
मक्का दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सुरक्षा अलर्ट को बेहद गंभीरता से देखा जाता है।
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 14 सितंबर को हुए हमलों में 13 नागरिक घायल हुए। उनके अनुसार खमीस मुशैत, आभा और ताइफ के आसपास मिसाइल और ड्रोन से जुड़े हमलों की घटनाएं सामने आईं।
प्रवक्ता ने कई रिहायशी मकानों और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी दी। सऊदी अधिकारियों ने हमलों को अपनी संप्रभुता और नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया है।
यमन के हूती समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हूतियों के मुताबिक, उन्होंने खमीस मुशैत स्थित सऊदी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमला किया।
समूह ने सैन्य ठिकाने पर मौजूद रडार, रनवे, हैंगर और हथियारों के भंडार को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। हालांकि, हूतियों की ओर से किए गए नुकसान के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष में 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ था। इसके बाद हिंसा के स्तर में कमी आई थी, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और अलग-अलग सैन्य घटनाओं के कारण स्थायी शांति की कोशिशें लगातार चुनौती का सामना करती रही हैं।
अब नए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने एक बार फिर सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
सऊदी अरब के लिए सुरक्षा चुनौती सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। देश की तेल और ऊर्जा व्यवस्था पहले भी ड्रोन और मिसाइल हमलों के निशाने पर रही है। ऐसे में किसी बड़े हमले की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों ने खाड़ी देशों के लिए यह चिंता बढ़ा दी है कि अलग-अलग सशस्त्र समूहों के हमले एक-दूसरे से जुड़कर बड़े सुरक्षा संकट का रूप ले सकते हैं।
सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक संबंधित इलाकों में जारी इमरजेंसी अलर्ट बाद में हटा लिया गया। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह घटनाक्रम एक सीमित सैन्य टकराव तक रहेगा या फिर सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव एक बार फिर बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
मक्का क्षेत्र तक सुरक्षा चेतावनी पहुंचना सऊदी अरब के लिए खास तौर पर संवेदनशील घटनाक्रम है। आने वाले दिनों में हूती हमलों और सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई पर पूरे खाड़ी क्षेत्र की नजर रहेगी।
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