नई दिल्ली: 40 की उम्र के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं। इस दौर में हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े उम्र संबंधी बदलाव होने लगते हैं। ऐसे में खान-पान, नींद और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना आगे की सेहत के लिए अहम हो जाता है।
पोषण विशेषज्ञ श्वेता शाह ने 40 की उम्र के बाद सुबह की तीन आसान आदतों को दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया है। इनमें पौष्टिक भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और 15 से 20 मिनट की शारीरिक गतिविधि शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन आदतों को तुरंत असर दिखाने वाले उपाय के बजाय नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाना ज्यादा जरूरी है।
KIMS Hospitals, ठाणे की चीफ डाइटीशियन डीटी अमरीन शेख के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में मांसपेशियों का द्रव्यमान धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में पर्याप्त प्रोटीन वाली संतुलित डाइट मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
अधिकांश वयस्कों के लिए नाश्ते में 20 से 30 ग्राम प्रोटीन लेना एक उपयोगी लक्ष्य हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की प्रोटीन की जरूरत उसके शरीर के आकार, उम्र, शारीरिक गतिविधि और पूरे दिन के खान-पान के आधार पर अलग हो सकती है।
सुबह पर्याप्त प्रोटीन लेने से मांसपेशियों के रखरखाव में मदद मिल सकती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। साथ ही, दिन की शुरुआत प्रोटीन युक्त भोजन से करने पर रोज की कुल प्रोटीन जरूरत पूरी करना भी आसान हो जाता है।
सुबह के नाश्ते में भीगी हुई काली किशमिश और सौंफ को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, डीटी अमरीन शेख के मुताबिक, इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि यह संयोजन खास तौर पर 40 की उम्र के बाद शरीर को कोई विशेष फायदा पहुंचाता है।
उनके अनुसार, ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति रोज पर्याप्त पोषण ले, नियमित शारीरिक गतिविधि करे और पूरी नींद ले। यानी केवल किसी एक खाद्य पदार्थ या संयोजन पर निर्भर रहने के बजाय पूरी दिनचर्या को संतुलित रखना जरूरी है।
डीटी अमरीन शेख के अनुसार, सुबह 15 से 20 मिनट टहलना दिन की शुरुआत करने का अच्छा तरीका हो सकता है। इससे शरीर सक्रिय होता है और रोजाना की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में मदद मिलती है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकता है।
खाने के बाद कुछ देर टहलने से भोजन के बाद बढ़ने वाले ब्लड ग्लूकोज को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, रोज केवल 15 से 20 मिनट तक ही चलना जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे वॉक का समय बढ़ाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वयस्कों को धीरे-धीरे हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके साथ मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
डीटी अमरीन शेख के अनुसार, धीमी और नियंत्रित सांस लेने का अभ्यास शरीर और दिमाग को आराम देने में मदद कर सकता है। इससे तनाव और चिंता की भावना कम करने तथा मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है।
सुबह 5 से 10 मिनट आराम से, गहरी और धीमी सांस लेने का अभ्यास दिन की शुरुआत शांत तरीके से करने में सहायक हो सकता है। इस दौरान नाक से धीरे-धीरे सांस लें और बिना किसी जोर के आराम से सांस छोड़ें।
नियमित अभ्यास से व्यक्ति को अपने सांस लेने के तरीके पर बेहतर नियंत्रण महसूस हो सकता है। हालांकि, सांसों की इस एक्सरसाइज को किसी बीमारी के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अमरीन शेख के मुताबिक, 40 की उम्र के बाद ऐसी आदतों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें लंबे समय तक नियमित रूप से अपनाया जा सके। पर्याप्त प्रोटीन वाली डाइट, रोजाना शारीरिक गतिविधि, अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित करने वाली आसान तकनीकों को दिनचर्या में शामिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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