नई दिल्ली: सितंबर की पूर्णिमा को खास माना जाता है और इसे Harvest Moon यानी फसल का चांद कहा जाता है। यह नाम उस पूर्णिमा के लिए इस्तेमाल होता है, जो शरद ऋतु की शुरुआत के समय पड़ने वाली विषुव तिथि के सबसे करीब होती है। पुराने समय में किसान फसल काटने के लिए चांदनी का सहारा लेते थे। पूर्णिमा की तेज रोशनी से सूर्यास्त के बाद भी खेतों में काम करना आसान हो जाता था।
भारत में इस साल Harvest Moon को 26 सितंबर की रात देखा जा सकता है। हालांकि, 25 सितंबर की रात भी चांद लगभग पूरा दिखाई देगा और 27 सितंबर को भी यह काफी हद तक पूर्ण नजर आएगा। दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर को चांद करीब 98.9 प्रतिशत और 27 सितंबर को लगभग 99.9 प्रतिशत रोशन रहेगा।
Harvest Moon का नाम खेती की पुरानी परंपरा से जुड़ा है। शरद विषुव के आसपास आने वाली पूर्णिमा कई रातों तक सूर्यास्त के कुछ समय बाद दिखाई देती है। पुराने समय में जब खेतों में काम करने के लिए बिजली की सुविधा नहीं थी, तब चांदनी किसानों के लिए अतिरिक्त रोशनी का काम करती थी। इससे उन्हें शाम के समय फसल काटने में सुविधा होती थी।
यही वजह है कि इस पूर्णिमा को Harvest Moon यानी फसल का चांद कहा जाने लगा। हालांकि, यह चांद देखने में सामान्य पूर्णिमा से अलग रंग या आकार का नहीं होता।
पूर्णिमा का महत्व केवल खगोलीय घटना तक सीमित नहीं है। आध्यात्मिक साधना करने वाली कुछ परंपराओं में इस दिन को ध्यान और दूसरी साधनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग के निदेशक और वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन, इंडिया के ट्रस्टी श्रीराम राजगोपाल ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि आध्यात्मिक साधना में पूर्णिमा के दिनों को विशेष महत्व दिया जाता है। उनके अनुसार, साधक इस समय को आध्यात्मिक विकास, सेवा और धरती के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
राजगोपाल के अनुसार, आध्यात्मिक साधना करने वाले लोग पूर्णिमा को ऐसा समय मानते हैं, जब धरती पर ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है। इस दौरान ध्यान और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं। यह संबंधित आध्यात्मिक परंपरा की मान्यता है।
अगर आप किसी आध्यात्मिक साधना का पालन करते हैं, तो पूर्णिमा की रात कुछ समय शांत होकर ध्यान या मनन में बिताया जा सकता है। दया, क्षमा, शांति और सद्भावना जैसी भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना भी ऐसी साधनाओं का हिस्सा हो सकता है।
राजगोपाल के मुताबिक, कई आध्यात्मिक परंपराओं में पूर्णिमा के दिन सामूहिक ध्यान को विशेष महत्व दिया जाता है। साधक इस समय को आध्यात्मिक अभ्यास और सकारात्मक भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के अवसर के रूप में देखते हैं।
प्राणिक हीलिंग में Twin Hearts Meditation का भी विशेष उल्लेख मिलता है। इस साधना में हृदय और सिर के ऊपरी हिस्से से जुड़े ऊर्जा केंद्रों को सक्रिय करने के बाद धरती और उसके लोगों के लिए प्रेम, शांति, दया, क्षमा, उम्मीद, विश्वास, खुशी और सद्भावना की भावना के साथ आशीर्वाद देने की प्रक्रिया शामिल है।
राजगोपाल के मुताबिक, नियमित अभ्यास से शरीर को शांत रखने, विचारों और भावनाओं को स्थिर करने तथा जागरूकता और आंतरिक शांति बढ़ाने में मदद मिलती है। उनके अनुसार, यह साधना व्यक्ति को अपनी निजी जरूरतों से आगे बढ़कर परिवार, समाज और धरती के प्रति सद्भावना रखने के लिए भी प्रेरित करती है।
वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग की साधना में सामूहिक ध्यान को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। राजगोपाल ने बताया कि पूर्णिमा के दौरान साथ मिलकर ध्यान करना आध्यात्मिक विकास और दुनिया की सेवा का एक अवसर माना जाता है।
मॉडर्न प्राणिक हीलिंग और आर्हटिक योग के संस्थापक ग्रैंड मास्टर चोआ कोक सुई के अनुसार, जब सात या उससे अधिक लोग साथ में ध्यान करते हैं तो वे उतनी ऊर्जा पैदा कर सकते हैं, जितनी 100 लोग अलग-अलग ध्यान करके पैदा करते हैं। हालांकि, यह प्राणिक हीलिंग परंपरा की एक मान्यता है और इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माप नहीं माना जाना चाहिए।
Harvest Moon देखने के लिए किसी खास या जटिल पूजा-पाठ की जरूरत नहीं है। किसी शांत और खुले स्थान से चांद को देखा जा सकता है। इस दौरान कुछ मिनट ध्यान या मनन भी किया जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति Twin Hearts Meditation या किसी अन्य आध्यात्मिक साधना का अभ्यास करता है तो उसे अपनी परंपरा या किसी योग्य प्रशिक्षक द्वारा बताए गए तरीके का ही पालन करना चाहिए।
चांद के अलग-अलग नामों को लेकर अक्सर लोगों के बीच भ्रम रहता है। Blue Moon का मतलब यह नहीं है कि चांद नीले रंग का दिखाई देता है। जब एक कैलेंडर महीने में दो बार पूर्णिमा आती है, तो दूसरी पूर्णिमा को आम तौर पर Blue Moon कहा जाता है। इसी तरह, एक ही मौसम में चार पूर्णिमा पड़ने की स्थिति में तीसरी पूर्णिमा को भी Blue Moon कहा जाता है।
Super Moon उस स्थिति को कहा जाता है, जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होता है। इस दौरान वह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में करीब 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई दे सकता है।
वहीं, Blood Moon नाम पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान लाल दिखाई देने वाले चंद्रमा के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसा तब होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंचती। पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली रोशनी के प्रभाव के कारण चंद्रमा लाल दिखाई दे सकता है।
Harvest Moon इन घटनाओं से अलग है। इसका नाम मुख्य रूप से पूर्णिमा के समय और खेती से जुड़ी पुरानी परंपरा के कारण पड़ा है। 26 सितंबर की रात दिखाई देने वाला चांद भी सामान्य पूर्णिमा की तरह ही नजर आएगा।
बलिया: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम…
लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवाद का एक बड़ा स्तंभ ढह गया है।…
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों के बीच विपक्ष ने उन्हें…
नई दिल्ली: सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आने से होने वाले हादसों…
वॉशिंगटन: अमेरिका दौरे से लौटते वक्त चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप…
दुबई: अगर बॉस अचानक सभी कर्मचारियों को मीटिंग रूम में बुला ले, तो आमतौर पर…