लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवाद का एक बड़ा स्तंभ ढह गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (PGI) में इलाज के दौरान निधन हो गया।
सपा के नवागत जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि पार्टी कार्यकर्ता व नेता उनके अंतिम दर्शनों के लिए लखनऊ रवाना हो रहे हैं। बलिया से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक उनके निधन की खबर से शोक की लहर दौड़ गई है।
बलिया के गोसाईपुर गांव में जन्मे राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर जयप्रकाश नारायण (JP) के आंदोलन और छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। एलएलबी (LLB) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत के साथ-साथ जनसेवा की राह चुनी।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों के ही वे बेहद करीबी व रणनीतिकार रहे।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बांसडीह सीट पर उन्हें भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह से कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उनके जाने से न केवल बलिया, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश ने एक बेबाक और निडर समाजवादी चेहरा खो दिया है।
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