रेगिस्तान की तपती धरती अब सिर्फ बंजर जमीन की दास्तान नहीं कहती, बल्कि यहां हरियाली के साथ-साथ ‘हरियाली वाली कमाई’ की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जरा सोचिए, महज 200 रुपये का एक छोटा सा पौधा कुछ सालों की देखभाल के बाद आपको मालामाल कर दे और हर पेड़ से लाखों की कमाई होने लगे! सुनने में यह किसी जादुई कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है ‘महोगनी’ के उस पेड़ की, जिसे अब किसान प्यार से ‘चलता-फिरता पैसों का पेड़’ कहने लगे हैं। राजस्थान के बाड़मेर जैसी सूखी और गर्म जमीन, जहां तापमान 50 डिग्री को छू लेता है, वहां इस पेड़ का 12 से 15 फीट ऊंचा लहराना हर किसी को हैरान कर रहा है।
बाड़मेर के रातानाडा इलाके में स्थित मां सती दक्षिणी मंदिर परिसर में इन दिनों एक ऐसा अनोखा पेड़ लोगों के बीच भारी उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है, जिसे आम बोलचाल में ‘पैसों वाला पेड़’ कहा जाता है। मंदिर के अध्यक्ष वासुदेव जोशी ने फेसबुक से ऑनलाइन मात्र 200 रुपये में महोगनी का पौधा मंगवाकर लगाया था। आज 3 साल की कड़ी मेहनत के बाद यह पौधा एक मजबूत पेड़ का रूप ले चुका है।
महोगनी की लकड़ी अपनी अद्वितीय मजबूती, सुंदर लाल-भूरी रंगत और पानी प्रतिरोधक गुणों के कारण वैश्विक बाजार में ‘लकड़ी का राजा’ मानी जाती है। इसके इसी टिकाऊपन और जल-प्रतिरोधी स्वभाव के कारण इसका उपयोग पानी के बड़े जहाजों, महंगे फर्नीचर, सजावटी सामान और संगीत वाद्ययंत्रों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार, महोगनी का यह पेड़ आने वाले समय में किसी भी बैंक की फिक्स डिपॉजिट (FD) स्कीम से कहीं ज्यादा बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है। यह पेड़ करीब 12 साल में पूरी तरह परिपक्व (Mature) होकर तैयार हो जाता है।
इसकी लकड़ी की कीमत प्रजाति, उम्र, आकार और बाजार की मौजूदा मांग के आधार पर तय होती है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, परिपक्व होने के बाद महोगनी की लकड़ी 1500 से 2500 रुपये प्रति घन फुट तक के ऊंचे भाव बिकती है। यही वजह है कि रेगिस्तान की इस जमीन पर लगाया गया यह पौधा अब किसानों के लिए भविष्य का एक बड़ा आर्थिक सहारा बनता जा रहा है।
महोगनी की खूबी सिर्फ इसकी बेशकीमती लकड़ी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका हर एक हिस्सा औषधीय और व्यावसायिक रूप से बेहद उपयोगी है।
महोगनी की खेती राजस्थान जैसे गर्म और शुष्क इलाकों में किसानों के लिए एक संभावित वैकल्पिक आय का जरिया बनकर सामने आ रही है। हालांकि इसकी वास्तविक कमाई पेड़ की प्रजाति, देखभाल, उम्र, लकड़ी की गुणवत्ता और बाजार भाव पर निर्भर करती है। इसलिए इसे ‘पैसों का पेड़’ समझकर निवेश करने से पहले कृषि विशेषज्ञों की सलाह और स्थानीय बाजार की जानकारी जरूर लेना जरूरी है।
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