लखनऊ.खांसी की साधारण दवा समझे जाने वाला कफ सिरप अब एक खतरनाक नशे का हथियार बन चुका है. कोडीन युक्त कफ सिरप का यह अवैध नेटवर्क सिर्फ यूपी-बिहार ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश तक फैल चुका है.
वाराणसी में करोड़ों की बरामदगी के बाद उठे सवालों ने पूरे प्रदेश के प्रशासन और ड्रग विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. और इस पूरे रैकेट के केंद्र में माना जा रहा है एक नाम: शुभम जायसवाल, जो फिलहाल फरार है.
हम आपको आज उस काले साम्राज्य की बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने कोडीन युक्त कफ सिरप के सहारे समाज में मौत बाँटने का काम किया. साथ ही बताएंगे कि कैसे एक शख्स ने इसी काले कारोबार के दम पर महज कुछ सालों में अकूत दौलत का साम्राज्य खड़ा कर लिया.
वाराणसी का रहने वाला एक साधारण युवक शुभम जायसवाल महज तीन साल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा. लेकिन यह दौलत किसी मेहनत, बिजनेस या स्टार्टअप की देन नहीं थी-बल्कि एक जहरीले कफ सिरप के काले कारोबार का नतीजा थी. यह वही जहर था जिसने न जाने कितनी जिंदगियां मौत के मुहाने पर पहुँचा दीं, लेकिन शुभम और उसके गिरोह के लिए यह “जहरीला सिरप” सोने की खान बन गया.
शुभम जायसवाल ने रांची में रजिस्टर्ड ‘शैली ट्रेडर्स’ के नाम से इस गोरखधंधे की शुरुआत की और कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई कई राज्यों में फैलानी शुरू कर दी. देखते ही देखते उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान से लेकर बांग्लादेश की सीमा तक फैल गया। बस तीन साल में शुभम और उसके साथियों ने करोड़ों का काला साम्राज्य खड़ा कर लिया.
कैसे हुआ पर्दाफाश?
इस नेटवर्क का खुलासा अक्टूबर महीने में तब हुआ, जब सोनभद्र के चुर्क लाइन मोड़ पर चेकिंग के दौरान करीब 20,000 कफ सिरप की बोतलें बरामद की गईं. ये बोतलें दो कंटेनरों में नमकीन और चिप्स के पैकेटों के बीच छिपाकर ले जाई जा रही थीं। पुलिस ने मौके पर चार लोगों को गिरफ्तार किया.
इसके बाद यूपी पुलिस और SIT ने जब नेटवर्क खंगालना शुरू किया तो एक-एक करके परतें खुलती गईं और पूरा खेल उजागर हो गया. जांच में पता चला कि शुभम का गिरोह कफ सिरप को कभी पेंट की बाल्टियों में, कभी नमकीन के पैकेटों के बीच, तो कभी छोटे कैरियरों और साइकिलों के जरिए अलग-अलग राज्यों में तस्करी करता था. ये बोतलें बांग्लादेश तक 8 से 10 गुना ज्यादा कीमत पर बेची जा रही थीं.
अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल
इस मामले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कठोर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि “उत्तर प्रदेश के हर कोने में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है और कोडीन सिरप को नशे के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है.” उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की थी.
सबसे बड़ा सवाल-आखिर असली खिलाड़ी कौन?
भले ही शुभम जायसवाल और उसके साथी पुलिस के radar पर आ चुके हों, लेकिन जांच अभी भी कई सवालों पर अटकी है। क्या तीन साल में करोड़ों की संपत्ति और इतना बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क सिर्फ शुभम के बूते खड़ा हो सकता है?
क्या इस काले साम्राज्य के पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड, कोई सफेदपोश या कोई सरकारी संपर्क खड़ा है, जो अभी तक पुलिस और SIT की पकड़ में नहीं आया?
जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है इस जहरीले कफ सिरप गैंग का असली ‘गॉडफादर’ आखिर कौन है?