दक्षिण कोरिया के बुसान में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात दोनों देशों के लिए राहत भरी रही. इस बहुप्रतिक्षित मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई थी. डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच लगभग छह साल बाद हुई. जिसके बाद, वैश्विक व्यापार को पटरी पर लाने की दिशा में एक पहला ठोस कदम माना जा रहा है.
ये बैठक वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के खतरे और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ युद्ध के तनाव के बीच हुई. दोनों राष्ट्र प्रमुखों में लगभग 1घंटे 40 मिनट की बातचीतहुई. जिसमें दोनों नेताओं ने तनाव कम करने और व्यापारिक रिश्तों को सामान्य बनाने पर जोर दिया.
बैठक के तुरंत बाद ट्रंप द्वारा की गई घोषणाएं बताती हैं कि दोनों पक्ष व्यापार युद्ध विराम (Trade Truce) को खत्म करने की दिशा में सकारात्मक रूप से आगे बढ़े हैं. अमेरिकी प्रशासन ने चीन से आयात होने वाले फेन्टानिल (एक मादक पदार्थ) से जुड़े टैरिफ को 10% तक घटाने का फैसला किया है. इसे अमेरिका की तरफ से चीन के प्रति सद्भावना दिखाने वाले एक शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है.
तो वहीं दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ मिनरल की आपूर्ति पर एक एक वर्षीय समझौत भी हुआ. ये खनिज उन्नत प्रौद्योगिकी, सैन्य उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए महत्वपूर्ण हैं और चीन का इन पर वैश्विक एकाधिकार है. इस समझौते से अमेरिकी हाई-टेक इंडस्ट्रीज को एक बड़ी राहत मिली है, जो चीन के संभावित निर्यात प्रतिबंधों से चिंतित थीं.
आगे की चुनौतियां
बुसान की बैठक ने केवल आर्थिक मोर्चे पर तत्काल तनाव को कम जरूर किया है. लेकिन व्यापार के अलावा, कई बड़े भू-राजनीति मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं जो दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते रहेंगे. जिसमें ताइवान का मुद्दा भी शामिल है. यह चीन और अमेरिका के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा है. इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में चीन का सैन्यीकरण अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. तो सेमीकंडक्टर और 5G जैसी उन्नत तकनीकों पर नियंत्रण की प्रतिस्पर्धा अभी भी चरम पर है.
बहरहाल अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर जो सकारात्मकता दिखी है उससे भारत की उम्मीदें भी बढ़ गईं हैं.