वाराणसी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी में ऐसा बयान दिया है, जिसने उनके चुनाव लड़ने की रणनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जब उनसे वाराणसी की किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं, जब विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते।” अखिलेश ने यह भी कहा कि उन्हें शुभ और अशुभ समय का ज्ञान है। उनके इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरने के बजाय लोकसभा के रास्ते मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की रणनीति अपना सकते हैं।
‘हम सीएम तभी बनते हैं, जब विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते’
वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव से कहा गया कि उन्हें यहीं की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहिए। इस पर उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जब वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते, तभी मुख्यमंत्री बनते हैं। उन्होंने शुभ और खराब समय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इसका ज्ञान है और वह शुभ काम करेंगे।
अखिलेश ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले जब वह लोकसभा सांसद थे, तब भी उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके बयान से यह संकेत मिला कि इस बार भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रास्ता अपना सकते हैं।
2012 में सांसद रहते हुए बने थे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव के इस बयान के पीछे उनका पुराना राजनीतिक रिकॉर्ड भी है। साल 2012 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने थे। उस समय वह कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद थे।
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अखिलेश ने कन्नौज की लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह विधान परिषद के सदस्य बने। इसी पुराने घटनाक्रम का हवाला देकर अब अखिलेश ने एक बार फिर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने और मुख्यमंत्री बनने के अपने राजनीतिक फॉर्मूले की चर्चा की है।
पीडीए के जरिए अखिलेश ने फिर साधा सामाजिक समीकरण
वाराणसी में अखिलेश यादव ने अपने पीडीए फॉर्मूले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पीडीए में पिछड़े, दलित, शोषित, अल्पसंख्यक और पीड़ित वर्ग के लोग शामिल हैं। उनके मुताबिक, समाज के वे सभी लोग जो दुखी और वंचित हैं, इस दायरे में आते हैं।
अखिलेश लगातार पीडीए को अपनी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बताते रहे हैं। वाराणसी में भी उन्होंने इसी सामाजिक समीकरण के जरिए अलग-अलग वर्गों को साथ लाने की बात दोहराई।
पीएम मोदी पर निशाना, गंगा और वाराणसी के जाम का उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मां गंगा के नाम पर देश की जनता से जुड़ाव दिखाया था, उन्होंने बाद में मां गंगा को ही भुला दिया। इसे उन्होंने डबल हार का संदेश बताया।
वाराणसी की यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि यहां से देश के प्रधानमंत्री आते हैं और केंद्र तथा प्रदेश में लंबे समय से उनकी सरकार है, इसके बावजूद शहर के लोगों को जाम से राहत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने इस मुद्दे के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश की।
योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की दी थी चुनौती
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। बाद में योगी आदित्यनाथ ने भी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने का न्योता दिया था।
एक जनसभा में योगी ने कहा था कि अयोध्या उनका पवित्र धाम है और वह वहां विकास कार्यों की निगरानी के लिए जाते हैं। उन्होंने अखिलेश को आमने-सामने चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए अयोध्या से नामांकन करने को कहा था।
अब वाराणसी में अखिलेश यादव के ताजा बयान ने उनके अपने चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, उन्होंने अभी औपचारिक रूप से यह घोषणा नहीं की है कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं। फिलहाल उनके बयान को उनके पुराने राजनीतिक अनुभव और आगामी चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।