नई दिल्ली: सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ सिनेमाघरों में पहुंचने से पहले ही कानूनी विवाद में फंस गई है। फिल्म के टीजर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता डॉक्टरों का आरोप है कि टीजर में निजी अस्पतालों और वहां काम करने वाले चिकित्सकों की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति से स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ लोगों में गुस्सा और हिंसा की भावना बढ़ सकती है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है। खास बात यह है कि फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यानी अदालत में अगली सुनवाई फिल्म की रिलीज से महज चार दिन पहले होगी।
यह याचिका दिल्ली के अलग-अलग कॉर्पोरेट अस्पतालों में काम करने वाले चार डॉक्टरों डॉ. निशांत सोनी, डॉ. आशीष तोमर, डॉ. रवि भाटिया और डॉ. शिवम वत्सल ने दाखिल की है। इनमें से कुछ डॉक्टर डॉक्टर्स ऑफ कॉर्पोरेट सोसाइटी (DOCS) के पदाधिकारी भी हैं।
डॉक्टरों को फिल्म के टीजर से क्या आपत्ति है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने फिल्म के टीजर को लेकर संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें न्यायालय का रुख करना पड़ा।
डॉक्टरों के मुताबिक, टीजर में निजी अस्पतालों और वहां काम करने वाले चिकित्सकों को जिस तरह दिखाया गया है, उससे पूरे मेडिकल पेशे की छवि प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि इस तरह की कहानी स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति नकारात्मक माहौल बना सकती है और उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं को बढ़ावा देने का खतरा पैदा कर सकती है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों में मरीजों के परिजनों की ओर से डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं पहले से सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में इस तरह की सामग्री चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा सकती है।
मलयालम फिल्म ‘जोसेफ’ की हिंदी रीमेक है ‘सूर्या’?
याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सनी देओल की फिल्म ‘सूर्या’ साल 2018 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘जोसेफ’ का हिंदी रीमेक है। दिलचस्प बात यह है कि मलयालम फिल्म का निर्देशन करने वाले एम. पद्मकुमार ही हिंदी संस्करण के निर्देशक भी हैं।
‘जोसेफ’ की कहानी एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। वह एक निजी अस्पताल में ब्रेन-स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन के जरिए अंगों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कथित रैकेट का पर्दाफाश करता है। याचिकाकर्ताओं ने इसी कथानक और इसके टीजर में दिखाई गई परिस्थितियों को लेकर आपत्ति जताई है।
टीजर में मेडिकल सिस्टम को लेकर क्या दिखाया गया है?
डॉक्टरों की याचिका के अनुसार, फिल्म का टीजर 19 अक्टूबर को जी म्यूजिक कंपनी के यूट्यूब चैनल पर जारी किया गया था। इसमें कहानी को ‘अविश्वसनीय सच्ची घटनाओं से प्रेरित’ बताया गया है। साथ ही मेडिकल सिस्टम की ‘चौंकाने वाली सच्चाई’ सामने लाने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म की कहानी काल्पनिक होने के बावजूद उसे सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताकर पेश किया जा रहा है। इससे दर्शकों के बीच निजी अस्पतालों और डॉक्टरों को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, टीजर में एक निजी अस्पताल में ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित होने के बाद एक युवती के अंगदान के लिए सहमति लिए जाने का दृश्य दिखाया गया है। इसके अलावा चिकित्सकों पर मरीजों से अधिक पैसे वसूलने, गैर-जरूरी जांच कराने और कमीशन लेने जैसे आरोपों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
याचिका में टीजर पर दर्शकों की ओर से की गई कुछ टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है। डॉक्टरों का दावा है कि इन टिप्पणियों में मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों के खिलाफ धमकियां दी गई हैं और हिंसा के लिए उकसाने वाली बातें कही गई हैं।
डॉक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट से क्या मांग की है?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से फिल्म और उससे जुड़े प्रचार सामग्री की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर फिल्म और टीजर में बदलाव किए जाएं या जरूरी हिस्सों को हटाने के निर्देश दिए जाएं।
डॉक्टरों ने यह भी मांग की है कि फिल्म में स्पष्ट डिस्क्लेमर लगाया जाए। इसमें बताया जाए कि फिल्म की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसे वास्तविक घटनाओं पर आधारित नहीं माना जाना चाहिए।
इसके अलावा याचिका में अनुरोध किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से टीजर की जांच पूरी होने तक इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाया जाए या इसकी उपलब्धता पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं ने ऑनलाइन जारी होने वाले फिल्मी टीजर और ट्रेलर को भी फिल्म प्रमाणन के दायरे में लाने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
16 नवंबर को अगली सुनवाई, 20 नवंबर को रिलीज होनी है फिल्म
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, CBFC और फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। हालांकि अदालत ने अभी फिल्म के टीजर की स्क्रीनिंग या ऑनलाइन उपलब्धता पर कोई रोक नहीं लगाई है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। वहीं ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ को 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है। ऐसे में सुनवाई की तारीख और फिल्म की रिलीज के बीच सिर्फ चार दिन का अंतर है। अब देखना होगा कि अदालत में अगली सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माताओं और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या जवाब दिया जाता है।