Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: नदी की रेत में छिपा है सोना, फिर भी खाली हाथ लौटते हैं लोग! आखिर कैसे निकलते हैं कीमती कण और क्या है इस नदी का इतिहास?
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > फीचर > नदी की रेत में छिपा है सोना, फिर भी खाली हाथ लौटते हैं लोग! आखिर कैसे निकलते हैं कीमती कण और क्या है इस नदी का इतिहास?
फीचर

नदी की रेत में छिपा है सोना, फिर भी खाली हाथ लौटते हैं लोग! आखिर कैसे निकलते हैं कीमती कण और क्या है इस नदी का इतिहास?

vineet verma
Last updated: October 28, 2026 11:00 pm
vineet verma
Share
SHARE

रांची: झारखंड में बहने वाली एक ऐसी नदी भी है, जिसकी रेत में सोने के सूक्ष्म कण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इस नदी के किनारे रहने वाले कई ग्रामीण वर्षों से सोने की तलाश में जुटे हैं। सुबह से शाम तक नदी की रेत और मिट्टी छानने के बाद भी उनके हाथ कभी कुछ कण लगते हैं, तो कभी घंटों की मेहनत बेकार चली जाती है। इसके बावजूद उम्मीद खत्म नहीं होती, क्योंकि सोने के ये छोटे-छोटे कण कई परिवारों की आजीविका का सहारा हैं। इस नदी का नाम स्वर्णरेखा है, जिसे सुवर्णरेखा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी भौगोलिक बनावट, इतिहास और रेत में मौजूद सोने के कण इसे खास पहचान देते हैं।

Contents
स्वर्णरेखा नदी का नाम कैसे पड़ा, कहां से निकलती है यह नदी?नदी के किस हिस्से में मिलता है सोना?चट्टानों से नदी तक कैसे पहुंचते हैं सोने के कण?एक साथ जुटते हैं सैकड़ों ग्रामीण, ऐसे शुरू होती है सोने की तलाशरेत से सोना निकालने का तरीका जानिएएक-दो कणों के लिए घंटों मेहनत, फिर भी कमाई की कोई गारंटी नहींआखिर क्यों बार-बार लौटते हैं ग्रामीण, जब सोना मिलने की गारंटी नहीं?

स्वर्णरेखा नदी का नाम कैसे पड़ा, कहां से निकलती है यह नदी?

स्वर्णरेखा नाम का अर्थ है सोने की लकीर। नदी की रेत में सोने के सूक्ष्म कण मिलने की वजह से इसे यह नाम मिला माना जाता है। इसका उद्गम झारखंड की राजधानी रांची के पास नगरी गांव स्थित रानी चुआं से होता है। अलग-अलग विवरणों में इसकी कुल लंबाई लगभग 395 से 474 किलोमीटर के बीच बताई गई है। यह नदी झारखंड से निकलकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा से गुजरती है और अंत में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।

इस नदी की खासियत सिर्फ इसका नाम नहीं है। इसके किनारे बसे कुछ इलाकों में आज भी लोग रेत और मिट्टी से सोने के कण निकालते हैं। हालांकि, यहां मिलने वाला सोना बड़े टुकड़ों में नहीं होता। बेहद छोटे कणों को इकट्ठा करने के लिए ग्रामीणों को घंटों मेहनत करनी पड़ती है। कई बार दिनभर काम करने के बाद भी इतनी मात्रा नहीं मिल पाती कि उससे अच्छी कमाई हो सके।

नदी के किस हिस्से में मिलता है सोना?

स्वर्णरेखा नदी के हर हिस्से में सोने के कण नहीं मिलते। इसका एक खास इलाका ऐसा है, जहां ग्रामीण लंबे समय से यह काम करते आ रहे हैं। यह क्षेत्र जमशेदपुर शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में नदी के किनारे स्थित है।

यहां आसपास के गांवों के लोग नदी की रेत और मिट्टी में सोने के कण तलाशते हैं। उनके लिए यह केवल कीमती धातु की खोज नहीं, बल्कि रोजमर्रा का खर्च चलाने का एक साधन है। सोना मिलने की कोई गारंटी नहीं होती, फिर भी ग्रामीण इस उम्मीद में नदी तक पहुंचते हैं कि शायद उस दिन उनकी मेहनत रंग ले आए।

चट्टानों से नदी तक कैसे पहुंचते हैं सोने के कण?

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जब स्वर्णरेखा नदी तमाड़ क्षेत्र से होकर गुजरती है, तो वहां की कुछ चट्टानों में सोने की थोड़ी मात्रा मौजूद होती है। समय के साथ चट्टानों के टूटने और कटाव से निकली मिट्टी, पत्थर और तलछट पानी के साथ बहने लगते हैं। नदी का बहाव धीमा होने पर यह सामग्री कई जगह किनारों पर जमा हो जाती है। ऐसी जगहों पर भारी खनिजों के कण जमा होने की प्रक्रिया को प्लेसर निक्षेप कहा जाता है।

सोने के कणों की तलाश में जुटे लोगों के लिए यही जमा हुई रेत और मिट्टी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, नदी के बहाव के साथ इन कणों का वितरण बदलता रहता है। किसी स्थान पर कुछ मात्रा मिल सकती है, जबकि दूसरे हिस्से में काफी मेहनत के बाद भी कुछ हाथ नहीं लगता। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे पहले ऐसे स्थान की पहचान करें, जहां सोने के कण मिलने की संभावना हो।

एक साथ जुटते हैं सैकड़ों ग्रामीण, ऐसे शुरू होती है सोने की तलाश

स्वर्णरेखा नदी के आसपास लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में फैले दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण इस काम में लगे रहते हैं। सोना तलाशने के लिए वे नदी के उन किनारों को चुनते हैं, जहां पानी के बहाव के साथ पत्थर, बालू और मिट्टी जमा होती है। इसके बाद पत्थरों को हटाकर रेत की परत के नीचे मौजूद मिट्टी तक पहुंचने की कोशिश की जाती है।

इस काम में अनुभव की भी अहम भूमिका होती है। ग्रामीण नदी के बहाव और किनारे पर जमा सामग्री को देखकर ऐसी जगह चुनते हैं, जहां सोने के कण मिलने की संभावना हो। एक बार मिट्टी निकाल लेने के बाद असली मेहनत शुरू होती है, क्योंकि उसमें मौजूद सोने को बाकी सामग्री से अलग करना आसान नहीं होता।

रेत से सोना निकालने का तरीका जानिए

सोने के कण निकालने के लिए ग्रामीण मिट्टी को एक गहरे सूपनुमा बर्तन में रखते हैं और धीरे-धीरे पानी से धोते हैं। इस प्रक्रिया में हल्की मिट्टी और दूसरी सामग्री पानी के साथ बह जाती है, जबकि भारी होने के कारण सोने के कण बर्तन की गहराई में जमा रह जाते हैं।

इसके बाद इन कणों को सावधानी से अलग कर एल्युमिनियम के कटोरे में रखा जाता है। कटोरे को धूप में सुखाया जाता है, ताकि बची हुई नमी खत्म हो जाए। जब पानी सूख जाता है, तो सोने के बचे हुए छोटे-छोटे कणों को कागज में सुरक्षित रख लिया जाता है।

यह पूरी प्रक्रिया देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसमें काफी समय और शारीरिक मेहनत लगती है। मिट्टी को बार-बार धोना, सोने के कणों को अलग करना और उन्हें संभालकर रखना धैर्य का काम है। थोड़ी-सी लापरवाही से बेहद छोटे कण पानी के साथ बह भी सकते हैं।

एक-दो कणों के लिए घंटों मेहनत, फिर भी कमाई की कोई गारंटी नहीं

स्वर्णरेखा नदी में सोना तलाशने वाले ग्रामीणों की जिंदगी आसान नहीं है। कड़ी धूप, सर्दी और बारिश के बीच उन्हें नदी के किनारे घंटों झुककर काम करना पड़ता है। कई बार घुटनों के बल बैठकर गड्ढों में जमा मिट्टी को धोना पड़ता है। इसके बाद भी पर्याप्त सोना मिलने की कोई निश्चितता नहीं होती।

ग्रामीणों के लिए परेशानी केवल सोने के कण ढूंढने तक सीमित नहीं है। उन्हें बेहद कम मात्रा में मिले सोने को इकट्ठा करके बेचना भी पड़ता है। बिक्री की कीमत सोने के पॉइंट के आधार पर तय होती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दुकानदार एक पॉइंट के लिए लगभग 120 रुपये देते हैं। इस तरह कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि किसी दिन कितने कण मिलते हैं और उनसे कितने पॉइंट बनते हैं।

इस काम में लगे लोगों को सोना निकालने के लिए किसी विशेष मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ती। फिर भी मेहनत और आमदनी के बीच बड़ा अंतर बना रहता है। कभी दिनभर की कोशिश के बाद थोड़ी-सी कमाई होती है, तो कभी हाथ पूरी तरह खाली रह जाते हैं।

आखिर क्यों बार-बार लौटते हैं ग्रामीण, जब सोना मिलने की गारंटी नहीं?

स्वर्णरेखा नदी से सोना निकालने की कहानी सिर्फ कीमती धातु की तलाश की नहीं, बल्कि रोजी-रोटी के संघर्ष की भी है। नदी के किनारे रहने वाले कई परिवार लंबे समय से इस काम पर निर्भर हैं। उनके लिए रेत में मिलने वाले छोटे-छोटे कण भी मायने रखते हैं, क्योंकि उनसे घर का कुछ खर्च निकल सकता है।

घंटों की मेहनत के बावजूद सोना न मिलना निराश करता है, लेकिन अगले दिन फिर कोशिश करने की वजह भी यही उम्मीद बनती है कि शायद इस बार कुछ मिल जाए। स्वर्णरेखा की रेत में छिपे सोने की चमक भले ही दूर से आकर्षक लगे, लेकिन उस तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को कठिन शारीरिक श्रम करना पड़ता है। यही इस नदी की सबसे अलग पहचान है, जहां सोने की तलाश में हर दिन मेहनत होती है और हर दिन नतीजे का इंतजार।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Gold in River Sand, Gold Panning India, Jharkhand Gold River, Subarnarekha River, चांडिल स्वर्णरेखा नदी, झारखंड की सोने वाली नदी, झारखंड पर्यटन, नदी की रेत में सोना, रांची की नदी, सरायकेला खरसावां, सुवर्णरेखा नदी, सुवर्णरेखा नदी में सोना कैसे निकलता है, सोने के कण, स्वर्णरेखा नदी, स्वर्णरेखा नदी का इतिहास
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article ‘रामायण’ की एडवांस बुकिंग में 2.77 लाख टिकट बिके, फिर भी क्यों पीछे रह गई फिल्म? अब ‘पुष्पा 2’ का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती
Next Article ‘मेरा लोन माफ कर दो…’ 28 साल के किसान का दर्दनाक सुसाइड नोट, पीछे छूट गए मां-पत्नी और 2 मासूम बच्चे; 4 फाइनेंस कंपनियों से था कर्ज

फीचर

View More

रात के सन्नाटे में क्यों रोने लगते हैं कुत्ते? क्या सच में दिखता है उन्हें भूत-प्रेत, या है इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह?

नई दिल्ली: रात का सन्नाटा हो और अचानक किसी कुत्ते के रोने या लंबी आवाज निकालने की आवाज सुनाई दे,…

By vineet verma 8 Min Read

तोते सिर्फ इंसानों की नकल नहीं करते, पहेलियां भी सुलझाते हैं! आखिर इनके छोटे से दिमाग में ऐसा क्या है खास?

नई दिल्ली: तोते को इंसानों की आवाज की नकल करते और सुने…

11 Min Read

क्या इंसानों की तरह जानवर भी होते हैं डिप्रेशन के शिकार? साथी की मौत से लेकर अकेलेपन तक, जानें क्या हैं बड़ी वजहें

नई दिल्ली: डिप्रेशन को आमतौर पर इंसानों से जोड़कर देखा जाता है,…

8 Min Read

विचार

View More

‘हम खुद अपनी बर्बादी बना रहे हैं’, AI से डरा 10 साल का अनुभव रखने वाला इंजीनियर! अब कोडिंग छोड़ खेती करने का क्यों कर रहा है विचार?

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत ने अब…

October 27, 2026

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए,…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

You Might Also Like

Latest Newsफीचर

रात के सन्नाटे में क्यों रोने लगते हैं कुत्ते? क्या सच में दिखता है उन्हें भूत-प्रेत, या है इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह?

नई दिल्ली: रात का सन्नाटा हो और अचानक किसी कुत्ते के रोने या लंबी आवाज निकालने की आवाज सुनाई दे,…

8 Min Read
Latest Newsफीचर

तोते सिर्फ इंसानों की नकल नहीं करते, पहेलियां भी सुलझाते हैं! आखिर इनके छोटे से दिमाग में ऐसा क्या है खास?

नई दिल्ली: तोते को इंसानों की आवाज की नकल करते और सुने हुए शब्द दोहराते आपने जरूर देखा होगा। लेकिन…

11 Min Read
Latest Newsफीचर

क्या इंसानों की तरह जानवर भी होते हैं डिप्रेशन के शिकार? साथी की मौत से लेकर अकेलेपन तक, जानें क्या हैं बड़ी वजहें

नई दिल्ली: डिप्रेशन को आमतौर पर इंसानों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन क्या जानवर भी उदासी, तनाव और भावनात्मक…

8 Min Read
Trending Newsफीचर

खूंखार डाकू से ‘आदिकवि’ बनने की हैरान करने वाली दास्तान, जानिए कैसे रत्नाकर बन गए महर्षि वाल्मीकि

एक ऐसा शख्स जिसके नाम से कभी जंगलों में राहगीर थर-थर कांपते थे, जो बेकसूरों की हत्या करने से भी…

4 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?