बुलंदशहर: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद आकाश आनंद ने 28 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के साथ अपने रिश्ते, हाल के घटनाक्रमों और पार्टी में मिली जिम्मेदारी का जिक्र किया। मायावती से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए आकाश आनंद भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बहन जी से पूछा कि वह बार-बार उनकी परीक्षा क्यों लेती हैं, तो मायावती ने उन्हें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्षों की याद दिलाई। आकाश ने मंच से मायावती के सामने भरोसा जताया कि वह बहुजन समाज के लिए अपना सब कुछ त्यागने को तैयार हैं।
मायावती से पूछा- बार-बार मेरी परीक्षा क्यों लेती हैं?
आकाश आनंद ने जनसभा में कहा कि वह मायावती के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। उन्होंने हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि जब बहन जी ने उन्हें सजा दी थी, तब उन्होंने उनसे पूछा था कि आखिर वह बार-बार उनकी परीक्षा क्यों लेती हैं।
आकाश आनंद के मुताबिक, इस पर मायावती ने उन्हें समझाया कि जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संघर्षों और परीक्षाओं का सामना किया था, तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने से पहले उनकी परीक्षा लेना भी जरूरी है।
आकाश ने बताया कि मायावती ने उनसे कहा कि इतने बड़े आंदोलन, समाज और परिवार की जिम्मेदारी बिना परीक्षा लिए कैसे सौंपी जा सकती है। इस बात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह बहन जी के फैसले के लिए उनका धन्यवाद करते हैं और बहुजन समाज के हित में हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
‘मरते दम तक जितनी परीक्षा लेनी है, लीजिए’
मायावती की बात का जिक्र करते हुए आकाश आनंद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनकी आंखों में आंसू आ गए थे और उन्होंने बहन जी से यही कहा कि वह जब तक चाहें, उनकी परीक्षा ले सकती हैं।
आकाश आनंद ने कहा, “आदरणीय बहन जी, मरते दम तक आप जितनी परीक्षा लेना चाहें, आप लीजिए। हम तैयार हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि वह अपने परिवार का त्याग कर बहुजन समाज को अपना परिवार बनाने के लिए तैयार हैं। आकाश ने मंच से मायावती को भरोसा दिलाया कि उनके लिए बहुजन समाज ही परिवार है और वह इसके लिए आजीवन त्याग, तपस्या और मेहनत करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि जब तक बहुजन समाज को देश का शासक बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। उनके इस बयान को पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताने के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजेपी सरकार पर आकाश आनंद का हमला, विज्ञापनों पर खर्च का उठाया मुद्दा
जनसभा में आकाश आनंद ने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले 10 वर्षों के दौरान सरकार ने विज्ञापनों के जरिए विकास, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हैं।
आकाश आनंद ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने के लिए जनता के टैक्स के करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास प्रचार पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के लिए पैसे हैं, तो बुनियादी सुविधाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित काम क्यों नहीं दिखाई देता?
उन्होंने कहा कि मायावती लगातार अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों को सरकार की नीतियों के बारे में बताती रहती हैं। इसी क्रम में वह भी जनता के बीच कुछ मुद्दे रखना चाहते हैं।
अस्पताल में बच्चों की मौत और खाली पदों को लेकर सरकार को घेरा
आकाश आनंद ने सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं और सरकारी नौकरियों में खाली पदों का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी सरकार की आलोचना की। उन्होंने झांसी के एक सरकारी अस्पताल में आग लगने की घटना का जिक्र किया, जिसमें 10 बच्चों की मौत हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अपनी तारीफ के विज्ञापनों पर खर्च करने के लिए हजारों करोड़ रुपये हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और लोगों की जान बचाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
आकाश आनंद ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में 13 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विज्ञापनों और प्रचार पर बड़ी रकम खर्च कर रही है, लेकिन खाली पदों को भरने और युवाओं को रोजगार देने के मामले में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
मायावती की जिम्मेदारी के बाद आकाश आनंद का सियासी संदेश
बुलंदशहर की जनसभा में आकाश आनंद के भाषण के दो प्रमुख पहलू सामने आए। एक ओर उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए बार-बार परीक्षा लिए जाने की बात कही और बहुजन समाज के लिए आजीवन काम करने का संकल्प दोहराया। दूसरी ओर, उन्होंने बीजेपी सरकार को विज्ञापन खर्च, सरकारी अस्पतालों और खाली पदों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की।
बसपा प्रमुख मायावती की ओर से आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनका यह बयान पार्टी के भीतर अपनी भूमिका और बहुजन समाज के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।