Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: एसिड अटैक क्यों नहीं रुक रहे? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल, खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने की उठी मांग
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > एसिड अटैक क्यों नहीं रुक रहे? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल, खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने की उठी मांग
Trending Newsराज्य

एसिड अटैक क्यों नहीं रुक रहे? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल, खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने की उठी मांग

vineet verma
Last updated: October 27, 2026 11:13 pm
vineet verma
Share
SHARE

नई दिल्ली: देश में एसिड अटैक की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद एसिड की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं और बढ़ रही हैं, तो मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। साथ ही, एसिड की खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने या उसे और सख्ती से नियंत्रित करने के विकल्पों पर विचार करने को कहा है।

Contents
‘घटनाएं बढ़ रही हैं तो व्यवस्था में कुछ गड़बड़ी है’खुले बाजार में एसिड बेचने की जरूरत ही क्या है?केंद्र ने माना, नियम हैं लेकिन पालन में कमीपीड़ितों के इलाज के साथ रोजगार और सम्मानजनक जीवन पर जोरअस्पताल में भर्ती पीड़िता के लिए भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाने को कहामहिला वकील पर एसिड हमले का मामला भी उठादो सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई, केंद्र के जवाब पर नजर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ एसिड अटैक की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने साफ किया कि केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पालन की निगरानी और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।

‘घटनाएं बढ़ रही हैं तो व्यवस्था में कुछ गड़बड़ी है’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि एसिड अटैक रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो रही हैं। अगर इन घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है, तो इसका मतलब है कि मौजूदा व्यवस्था अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही है।

सीजेआई ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्यों से दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर जवाब मांगा है? क्या नियमों को लागू करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की गई है?

अदालत ने कहा कि प्रभावशाली भाषा में सर्कुलर जारी कर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नियम जमीन पर लागू भी हो रहे हैं या नहीं। केंद्र सरकार केवल दिशा-निर्देश जारी करके जिम्मेदारी राज्यों पर नहीं डाल सकती।

खुले बाजार में एसिड बेचने की जरूरत ही क्या है?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने एसिड की खुले बाजार में बिक्री की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई कामों के लिए अब दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं, ऐसे में एसिड को खुले बाजार में बेचने की अनुमति देने के पीछे क्या औचित्य है?

अदालत ने बांग्लादेश में एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए कड़े कानूनों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि औद्योगिक इस्तेमाल के लिए एसिड की थोक खरीद और आम लोगों को इसकी खुदरा बिक्री को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह पता लगाने को कहा कि एसिड की खुली बिक्री की अनुमति किन उद्देश्यों के लिए दी गई है। साथ ही, विशेषज्ञों का समूह बनाने का सुझाव दिया, जो यह जांच करे कि संबंधित कामों के लिए एसिड के अलावा दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं या नहीं।

अदालत के मुताबिक, जहां एसिड का इस्तेमाल अनिवार्य हो, वहां उसकी बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल खुले बाजार में बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

केंद्र ने माना, नियम हैं लेकिन पालन में कमी

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने केंद्र सरकार की ओर से बताया कि राज्यों को एसिड की बिक्री नियंत्रित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। राज्यों ने भी इस संबंध में नियम बनाए हैं, लेकिन उनका पालन सीमित स्तर पर हो रहा है।

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि एसिड की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने या मौजूदा नियमों को और सख्त करने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। संभावित उपायों में एसिड खरीदने वालों का रिकॉर्ड रखना और बिक्री को थोक विक्रेताओं तक सीमित करने जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

अदालत ने केंद्र से एसिड अटैक की घटनाओं में समय के साथ हुए बदलाव के आंकड़े भी पेश करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग का उद्देश्य कारखानों में एसिड के वैध और जरूरी इस्तेमाल में बाधा डालना नहीं, बल्कि इसकी बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है।

पीड़ितों के इलाज के साथ रोजगार और सम्मानजनक जीवन पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक से बचे लोगों के पुनर्वास को भी सुनवाई का अहम हिस्सा बनाया। अदालत ने कहा कि पीड़ितों को इलाज उपलब्ध कराने के साथ उनकी देखभाल, रोजगार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा।

पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से पेश किए गए प्रस्तावित ढांचे को अदालत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के पास विचार के लिए भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि NALSA और केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से सुझाव लेने चाहिए। इसमें एसिड अटैक से बचे लोगों की राय भी शामिल होनी चाहिए, ताकि पुनर्वास की व्यवस्था उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सके।

अस्पताल में भर्ती पीड़िता के लिए भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाने को कहा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सर गंगाराम अस्पताल में इलाज करा रही एक एसिड अटैक पीड़िता के मामले पर भी ध्यान दिया। अदालत ने अधिकारियों से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और इस संभावना पर विचार करने को कहा कि क्या पीड़िता को ऐसे कमरे में स्थानांतरित किया जा सकता है, जहां उसकी मां भी उसके साथ रह सके।

मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले में कहा कि पीड़ितों की मदद के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि पुनर्वास का मतलब केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों की देखभाल और उनकी व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

महिला वकील पर एसिड हमले का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली एक महिला वकील का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में उनके एक पुरुष सहकर्मी ने महिला पर एसिड फेंका था, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

वृंदा ग्रोवर के अनुसार, महिला का इलाज अब भी जारी है और तमाम मुश्किलों के बावजूद वह वकालत कर रही हैं। उन्होंने पीड़िता के रोजगार और अन्य राहत से जुड़े मुद्दों पर अदालत के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति मांगी।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस मामले पर विचार करेगी। यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि एसिड अटैक के बाद पीड़ितों को लंबे समय तक चिकित्सा, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

दो सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई, केंद्र के जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। केंद्र सरकार को एसिड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध या अधिक सख्त नियंत्रण लागू करने के विकल्पों पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

अब सुनवाई में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा दिशा-निर्देशों के पालन की निगरानी कैसे की जाए, नियमों का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही किस तरह तय हो और एसिड अटैक से बचे लोगों के पुनर्वास के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएं।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Acid Sale Restrictions, NALSA, Supreme Court on Acid Attacks, एसिड अटैक कानून, एसिड अटैक की घटनाएं, एसिड अटैक पीड़ितों का पुनर्वास, एसिड अटैक रोकने के नियम, एसिड की खुले बाजार में बिक्री, एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध, केंद्र सरकार, जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट एसिड अटैक
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article ‘अर्नब’ नाम का मतलब है समुद्र, बांग्लादेश ने क्यों चुना ये नाम? जानिए कैसे तय होते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम
Next Article 11 हजार की कैंसर दवा के लिए अस्पताल ने मांगे 1.30 लाख रुपये! सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कीमत में इतना अंतर क्यों, आखिर कहां जाता है पैसा?

फीचर

View More

रात के सन्नाटे में क्यों रोने लगते हैं कुत्ते? क्या सच में दिखता है उन्हें भूत-प्रेत, या है इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह?

नई दिल्ली: रात का सन्नाटा हो और अचानक किसी कुत्ते के रोने या लंबी आवाज निकालने की आवाज सुनाई दे,…

By vineet verma 8 Min Read

तोते सिर्फ इंसानों की नकल नहीं करते, पहेलियां भी सुलझाते हैं! आखिर इनके छोटे से दिमाग में ऐसा क्या है खास?

नई दिल्ली: तोते को इंसानों की आवाज की नकल करते और सुने…

11 Min Read

क्या इंसानों की तरह जानवर भी होते हैं डिप्रेशन के शिकार? साथी की मौत से लेकर अकेलेपन तक, जानें क्या हैं बड़ी वजहें

नई दिल्ली: डिप्रेशन को आमतौर पर इंसानों से जोड़कर देखा जाता है,…

8 Min Read

विचार

View More

‘हम खुद अपनी बर्बादी बना रहे हैं’, AI से डरा 10 साल का अनुभव रखने वाला इंजीनियर! अब कोडिंग छोड़ खेती करने का क्यों कर रहा है विचार?

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत ने अब…

October 27, 2026

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए,…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

You Might Also Like

Trending Newsवर्ल्ड

Israel Exit Polls 2026: नेतन्याहू को झटका, विपक्ष को बढ़त

इजरायल के शुरुआती एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को झटका लगता दिखाई दे रहा है।…

5 Min Read
Trending Newsराज्य

11 हजार की कैंसर दवा के लिए अस्पताल ने मांगे 1.30 लाख रुपये! सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कीमत में इतना अंतर क्यों, आखिर कहां जाता है पैसा?

नई दिल्ली: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों और निजी अस्पतालों के भारी…

10 Min Read
Trending Newsअन्य

‘अर्नब’ नाम का मतलब है समुद्र, बांग्लादेश ने क्यों चुना ये नाम? जानिए कैसे तय होते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां अलर्ट पर हैं।…

7 Min Read
Trending Newsवर्ल्ड

अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव में ट्रंप की परीक्षा, हारे तो बढ़ेंगी मुश्किलें! आखिर कैसे बदल सकता है सत्ता का पूरा गणित?

वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिड-टर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए…

12 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?