नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां अलर्ट पर हैं। इस तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट पर यनम के पास पहुंचने की आशंका जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक, तट पार करते समय इसकी हवा की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस बीच लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस तूफान का नाम ‘अर्नब’ ही क्यों रखा गया और चक्रवातों के नाम तय करने की प्रक्रिया क्या है?
‘अर्नब’ नाम का क्या है मतलब, किस देश ने रखा?
चक्रवात ‘अर्नब’ का नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह नाम उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए तैयार सूची का हिस्सा है। इसका उच्चारण ‘ओरनाब’ (Ornab) किया जाता है। बंगाली भाषा में ‘अर्नब’ का अर्थ समुद्र या महासागर होता है।
चक्रवातों को नाम देने का मकसद सिर्फ उनकी पहचान बनाना नहीं है। एक स्पष्ट नाम होने से मौसम विभाग, सरकारी एजेंसियों, आपदा प्रबंधन टीमों और आम लोगों को चेतावनियों को समझने और साझा करने में आसानी होती है। इससे एक ही समय में सक्रिय अलग-अलग मौसम प्रणालियों के बीच भ्रम की आशंका भी कम होती है।
कौन तय करता है चक्रवाती तूफानों के नाम?
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम तय करने की व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के तहत काम करने वाला उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल निर्धारित करता है।
इस क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था वर्ष 2004 में शुरू हुई थी। बाद में इसमें शामिल देशों की ओर से दिए गए नामों की सूची का विस्तार किया गया। उपलब्ध सूची के अनुसार, इस व्यवस्था में 13 देश शामिल हैं।
इन देशों में बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।
13 देशों ने दिए हैं 52 नाम, कैसे होता है इस्तेमाल?
इन 13 देशों ने चक्रवातों के लिए नामों की एक सूची तैयार की है, जिसमें कुल 52 नाम शामिल हैं। इस सूची को अप्रैल 2020 में अपनाया गया था। नामों का इस्तेमाल तय क्रम के अनुसार किया जाता है, ताकि हर नए चक्रवात को सूची में उपलब्ध अगला नाम दिया जा सके।
इस प्रक्रिया में देश अपनी ओर से नाम प्रस्तावित करते हैं और तय सूची के मुताबिक उनका इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह किसी तूफान का नाम मनमाने ढंग से नहीं रखा जाता, बल्कि यह क्षेत्रीय स्तर पर निर्धारित व्यवस्था का हिस्सा होता है।
चक्रवात का नाम रखने में IMD की क्या भूमिका है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अंतर्गत नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले उन चक्रवातों को नाम देता है, जो निर्धारित मानदंडों के अनुसार आवश्यक तीव्रता तक पहुंच जाते हैं।
नामकरण से मौसम एजेंसियों और प्रशासन को किसी खास चक्रवात से जुड़ी जानकारी साझा करने में सुविधा होती है। जब तूफान के रास्ते, हवा की रफ्तार या संभावित प्रभाव को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है, तो उसका नाम लोगों को चेतावनी पहचानने और उस पर ध्यान देने में मदद करता है।
आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने की आशंका, कई जिलों में अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार सुबह चक्रवात ‘अर्नब’ बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में केंद्रित था और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। इसके 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट पर यनम के पास पहुंचने की आशंका जताई गई है। अनुमान के अनुसार, यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार कर सकता है।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) ने श्रीकाकुलम समेत उत्तरी तटीय जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। संभावित प्रभाव को देखते हुए 16 जिलों की पहचान की गई है। इनमें 2,460 राजस्व गांव और 92 शहरी क्षेत्र शामिल हैं।
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के अलावा ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। तूफान के चलते रेल सेवाओं पर असर पड़ा है और हवाई यात्रा भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
तूफान से निपटने के लिए क्या हैं तैयारियां?
आंध्र प्रदेश में संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियां की गई हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 1,763 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 2,907 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं और 3,185 नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया है।
प्रभावित होने की आशंका वाले 11 अधिक जोखिम वाले जिलों में राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया दलों को भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने समुद्र तटों पर लोगों के जाने पर रोक लगाने और तटीय सड़कों पर आवाजाही नियंत्रित करने जैसे एहतियाती कदम उठाए हैं।
मछली पकड़ने वाली नावों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। APSDMA के अनुसार, कुल 30,043 नावों को सुरक्षित तरीके से बंदरगाहों पर लंगर डालकर रखा गया है।
चक्रवात का नाम भले ही ‘अर्नब’ हो, लेकिन मौसम विभाग और प्रशासन की प्राथमिकता इसके संभावित असर को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में जारी मौसम अलर्ट पर ध्यान देना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।