नई दिल्ली: दिनभर की भागदौड़, घंटों खड़े रहकर काम करना या लगातार चलने से पैरों में दर्द, भारीपन और मांसपेशियों में जकड़न महसूस होना आम बात है। ऐसे में कई लोग रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में पैर डुबोकर रखते हैं। इस तरीके को फुट सोकिंग (Foot Soaking) कहा जाता है। माना जाता है कि इससे पैरों की थकान कम करने, शरीर को आराम देने और बेहतर नींद लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके फायदे पानी के तापमान, व्यक्ति की सेहत और पैरों में मौजूद किसी समस्या पर भी निर्भर करते हैं।
पोस्चर और रीढ़ की हड्डी के अलाइनमेंट विशेषज्ञ एवं कायरोप्रैक्टर डॉ. हरीश ग्रोवर ने गुनगुने पानी में पैर डुबोने के साथ गर्दन पर कोल्ड पैक लगाने का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, इससे गर्दन और पैरों की तकलीफ में राहत मिल सकती है। वहीं, एप्सम सॉल्ट से फुट सोकिंग करने को भी मांसपेशियों को आराम देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, साइटिका, कब्ज या दूसरी बीमारियों के इलाज के तौर पर इस उपाय के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
गुनगुने पानी में पैर डुबोने से क्या फायदे हो सकते हैं?
दिनभर चलने या लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। ऐसे में गुनगुने पानी में कुछ देर पैर डुबोकर बैठने से आराम महसूस हो सकता है। पानी की गर्माहट मांसपेशियों को ढीला करने और हल्की अकड़न या थकान से अस्थायी राहत देने में मदद कर सकती है।
गुनगुने पानी के संपर्क में आने से पैरों की सतही रक्त वाहिकाएं फैल सकती हैं, जिससे उस हिस्से में रक्त प्रवाह कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। इसके अलावा, दिनभर की व्यस्तता के बाद शांत वातावरण में बैठकर फुट सोकिंग करने से शरीर रिलैक्स महसूस कर सकता है।
कुछ छोटे अध्ययनों में सोने से पहले गर्म पानी में पैर डुबोने और नींद की गुणवत्ता के बीच सकारात्मक संबंध देखा गया है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। बेहतर नींद के लिए नियमित समय पर सोना और सोने से पहले शांत माहौल बनाना भी जरूरी है।
क्या नमक या एप्सम सॉल्ट मिलाने से बढ़ जाते हैं फायदे?
साधारण नमक और एप्सम सॉल्ट अलग-अलग पदार्थ हैं। साधारण खाने के नमक में मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है, जबकि एप्सम सॉल्ट मैग्नीशियम सल्फेट है। दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर पैर डुबोने से आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इस बात के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि नमक मिलाने से केवल गर्म पानी की तुलना में दर्द या मांसपेशियों की जकड़न में अतिरिक्त लाभ मिलता है।
एप्सम सॉल्ट को भी पैरों के दर्द, साइटिका या अन्य बीमारियों का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाता। त्वचा के जरिए पर्याप्त मैग्नीशियम शरीर में पहुंचने और उससे मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलने के दावों पर अभी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
पैरों को गुनगुने पानी में कितनी देर रखें?
अगर आपके पैरों में कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसमें गर्म पानी से नुकसान हो सकता है, तो आप आराम के लिए कुछ देर फुट सोकिंग कर सकते हैं।
- एक टब में हल्का गुनगुना पानी लें। पानी इतना गर्म न हो कि त्वचा जलने लगे।
- चाहें तो बिना किसी अतिरिक्त पदार्थ के भी पैर पानी में रख सकते हैं।
- करीब 10 से 15 मिनट तक पैर डुबोकर रखें और असहजता होने पर तुरंत पैर बाहर निकाल लें।
- इसके बाद पैरों को साफ तौलिए से अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच की त्वचा को।
- त्वचा रूखी हो तो पैरों पर मॉइस्चराइजर लगा सकते हैं। उंगलियों के बीच मॉइस्चराइजर जमा न होने दें।
पानी में सेंधा नमक, सिरका या अदरक मिलाना जरूरी नहीं है। इन चीजों से शरीर डिटॉक्स होने, पीएच संतुलित होने या पाचन सुधरने जैसे दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। सिरका या अदरक कुछ लोगों की त्वचा में जलन भी पैदा कर सकते हैं।
किन लोगों को नमक के पानी में पैर डुबोने से बचना चाहिए?
फुट सोकिंग आम तौर पर स्वस्थ लोगों के लिए आराम का एक तरीका हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
डायबिटीज के मरीज: डायबिटीज के कारण पैरों में संवेदना कम हो सकती है। ऐसे में बहुत गर्म पानी से जलने का पता नहीं चलता। डॉक्टर की सलाह के बिना गर्म पानी में पैर डुबोने से बचें।
पैरों में घाव या संक्रमण: खुले घाव, त्वचा में संक्रमण, फटी त्वचा या जलन होने पर पैर भिगोने से समस्या बढ़ सकती है। पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
रक्त संचार की समस्या वाले लोग: पैरों में रक्त प्रवाह कम होने की स्थिति में गर्म पानी का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर से पूछकर ही फुट सोकिंग करनी चाहिए।
संवेदनशील त्वचा वाले लोग: नमक, सिरका या अन्य पदार्थों से जलन या एलर्जी हो सकती है। किसी भी चीज को पानी में मिलाना जरूरी नहीं है।
क्या इससे गर्दन दर्द, साइटिका और कब्ज में भी राहत मिलती है?
गुनगुने पानी में पैर डुबोने से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है, लेकिन इसे गर्दन दर्द, साइटिका या कब्ज का इलाज मानना सही नहीं है। गर्दन पर कोल्ड पैक लगाने से कुछ स्थितियों में दर्द या सूजन में अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल भी सावधानी से करना चाहिए। कोल्ड पैक को सीधे त्वचा पर न रखें, बल्कि कपड़े में लपेटकर इस्तेमाल करें।
अगर पैरों में दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार सुन्नपन होता है, सूजन दिखाई देती है या चलने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से जांच कराएं। इसी तरह गर्दन या कमर का दर्द लंबे समय तक बना रहने पर घरेलू उपायों के भरोसे इलाज टालना ठीक नहीं है।