नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफेद होना सामान्य है, लेकिन जब कम उम्र में ही बच्चों के सिर पर सफेद बाल नजर आने लगें, तो माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। कई बार लोग इसे सिर्फ खानपान की कमी से जोड़कर देखते हैं, जबकि इसके पीछे आनुवंशिक कारण और पोषक तत्वों की कमी समेत कई वजहें हो सकती हैं। ऐसे में सवाल है कि बच्चों के बाल समय से पहले सफेद क्यों होने लगते हैं? क्या विटामिन की कमी इसकी वजह हो सकती है और खानपान में बदलाव करके इस परेशानी से बचा जा सकता है?
बच्चों के बाल समय से पहले सफेद होने की क्या है वजह?
बालों का प्राकृतिक रंग मेलेनिन नामक वर्णक से तय होता है। जब बालों में मेलेनिन का उत्पादन कम होने लगता है, तो उनका रंग भूरा या सफेद दिखाई देने लगता है। बच्चों में कम उम्र में बाल सफेद होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिकता और शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी शामिल हैं।
विटामिन बी12, आयरन और फोलेट की कमी का संबंध भी समय से पहले बाल सफेद होने से हो सकता है। हालांकि, हर बच्चे में इसकी वजह एक जैसी नहीं होती। इसलिए सिर्फ सफेद बाल देखकर किसी विटामिन की कमी मान लेना सही नहीं है। समस्या का वास्तविक कारण जानने के लिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
बालों को सफेद होने से बचाने के लिए बच्चों को क्या खिलाएं?
बच्चों के शारीरिक विकास और बालों की सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार महत्वपूर्ण है। उनके भोजन में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी खनिजों से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए।
दाल, पनीर और अंडे प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। वहीं, पालक, चना और राजमा से आयरन और फोलेट मिल सकता है। अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ बच्चों के शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।
हालांकि, केवल खानपान में बदलाव से हर बच्चे के सफेद बाल दोबारा काले हो जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं है। अगर बाल सफेद होने की वजह आनुवंशिक है, तो पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने से जरूरी नहीं कि बालों का रंग बदल जाए।
विटामिन बी12 की कमी को न करें नजरअंदाज
विटामिन बी12 शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी का संबंध कुछ मामलों में बालों के समय से पहले सफेद होने से भी हो सकता है। दूध, दही और अंडे इसके प्रमुख खाद्य स्रोतों में शामिल हैं।
बच्चों की उम्र और खानपान के अनुसार उनके लिए पोषण से भरपूर भोजन चुनना चाहिए। अगर बच्चा सीमित खाद्य पदार्थ खाता है या उसके आहार में पशु-आधारित खाद्य पदार्थ शामिल नहीं हैं, तो विटामिन बी12 की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि, बिना जांच के यह मान लेना सही नहीं है कि सफेद बालों की वजह केवल विटामिन बी12 की कमी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से इसकी जांच कराई जा सकती है।
जिंक और कॉपर भी हैं जरूरी, डाइट में शामिल करें ये चीजें
बच्चों के शरीर को जिंक और कॉपर जैसे खनिजों की भी जरूरत होती है। ये शरीर की कई सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। मेवे, बीज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ इन पोषक तत्वों के स्रोत हो सकते हैं।
बच्चों को उम्र के अनुसार संतुलित आहार देना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियां, अनाज, दालें और प्रोटीन के उपयुक्त स्रोत शामिल हों। किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में विविधता बनाए रखना बेहतर है।
ध्यान रखें कि जिंक, कॉपर या अन्य पोषक तत्वों की खुराक अपनी मर्जी से देना उचित नहीं है। जरूरत से ज्यादा मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए सप्लीमेंट देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
बच्चों के बालों की देखभाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों के बालों की देखभाल में कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं। बालों में धीरे-धीरे कंघी करें और उन्हें बहुत कसकर बांधने से बचें। बाल धोने के लिए बच्चों के अनुकूल हल्के शैंपू का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सफेद बालों को छिपाने के लिए कम उम्र में रासायनिक हेयर डाई का इस्तेमाल करने से बचें। साथ ही, बालों का रंग बदलने के लिए किसी घरेलू नुस्खे या उत्पाद पर पूरी तरह निर्भर न रहें। अगर सफेद बाल बढ़ रहे हैं, तो पहले उनकी वजह समझना ज्यादा जरूरी है।
सफेद बालों के साथ दिखें ये लक्षण, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं
अगर बच्चे के सिर पर सफेद बाल लगातार बढ़ रहे हैं और साथ में थकान, कमजोरी, भूख कम लगना या उम्र के अनुसार वजन और लंबाई नहीं बढ़ने जैसी समस्याएं भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर बच्चे की उम्र, खानपान, पारिवारिक इतिहास और दूसरे लक्षणों को ध्यान में रखते हुए जरूरी जांच की सलाह दे सकते हैं। जांच में किसी पोषक तत्व की कमी सामने आने पर उसके अनुसार इलाज किया जा सकता है।
बच्चों में समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लेकिन घबराने की भी जरूरत नहीं है। सही कारण की पहचान, संतुलित आहार और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझा और संभाला जा सकता है।