नई दिल्ली: मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और गले में खराश की शिकायतें बढ़ने लगती हैं। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड के बीच कई लोग वायरल संक्रमण से परेशान हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या तापमान में उतार-चढ़ाव ही बीमार पड़ने की वजह है? बार-बार सर्दी-जुकाम होना क्या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का संकेत है या इसके पीछे एलर्जी भी जिम्मेदार हो सकती है? नहाने, बाल धोने और एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां रहती हैं।
इन सवालों के जवाब जानने के लिए यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, फरीदाबाद के सेक्टर-88 स्थित केंद्र में इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. जयंत ठाकुरिया से बातचीत की गई। डॉक्टर ने सर्दी-जुकाम के कारणों, सामान्य सर्दी और मौसमी एलर्जी के बीच अंतर, इलाज और बचाव से जुड़ी अहम बातें बताईं।
मौसम बदलते ही क्यों बढ़ने लगती है सर्दी-जुकाम की समस्या?
मौसम में बदलाव के दौरान तापमान और हवा में नमी का स्तर बदलता है। इन परिस्थितियों का असर श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। कुछ स्थितियों में सांस से जुड़े वायरस के प्रसार की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, लोग बंद जगहों पर अधिक समय बिताते हैं, जहां किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है।
डॉ. जयंत ठाकुरिया के मुताबिक, अचानक बदलता मौसम सांस की नलियों को अधिक संवेदनशील बना सकता है। इससे धूल, धुएं और प्रदूषण जैसे बाहरी कारकों के कारण परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सामान्य सर्दी-जुकाम सीधे ठंड लगने से नहीं, बल्कि वायरस के संक्रमण से होता है।
इससे बचने के लिए नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना, पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और पूरी नींद लेना जरूरी है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने के साथ संक्रमित लोगों के बहुत नजदीक रहने से भी बचना चाहिए।
सामान्य सर्दी-जुकाम है या एलर्जी? इन लक्षणों से करें पहचान
सामान्य सर्दी-जुकाम और मौसमी एलर्जी के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। दोनों ही स्थितियों में छींकें आने, नाक बहने और नाक बंद होने की समस्या हो सकती है। इसी वजह से कई लोग यह समझ नहीं पाते कि उन्हें संक्रमण हुआ है या किसी चीज से एलर्जी है।
सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर गले में खराश, खांसी और शरीर में हल्का दर्द भी हो सकता है। कुछ मामलों में हल्का बुखार भी आता है। इसके लक्षण आमतौर पर सात से दस दिनों में ठीक हो जाते हैं।
वहीं, मौसमी एलर्जी में नाक और आंखों में खुजली, बार-बार छींकें आना और नाक बहना प्रमुख लक्षण हैं। एलर्जी में आमतौर पर बुखार नहीं होता और परेशानी कई हफ्तों तक बनी रह सकती है। परागकण, धूल और दूसरे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व इसके कारण हो सकते हैं, जबकि सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के संक्रमण से होता है।
अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार लौटें, तो उनकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
सर्दी-जुकाम में नहाना या बाल धोना कितना सुरक्षित है?
सर्दी-जुकाम होने पर नहाना या बाल धोना आमतौर पर सुरक्षित है। इससे वायरस का संक्रमण नहीं बढ़ता। गुनगुने पानी से नहाने पर नाक बंद होने की परेशानी में कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है और बलगम ढीला पड़ सकता है।
हालांकि, इस दौरान बहुत ठंडे पानी से नहाने और लंबे समय तक ठंडे वातावरण में रहने से बचना चाहिए। नहाने के बाद शरीर और बालों को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। अगर तेज बुखार या काफी कमजोरी महसूस हो रही है, तो नहाने के बजाय आराम को प्राथमिकता दें और अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लें।
क्या सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक लेना जरूरी है?
सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ज्यादातर मामलों में सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है, जबकि एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में वायरल संक्रमण के दौरान इन दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान कर सकता है।
बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से दस्त, एलर्जी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा, एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भविष्य में बैक्टीरिया पर दवाओं के असर को कम कर सकता है।
सामान्य सर्दी-जुकाम में पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और लक्षणों के अनुसार इलाज से राहत मिल सकती है। नाक बंद होने पर सलाइन नेजल स्प्रे भी मददगार हो सकता है। यदि लक्षण गंभीर हों या लगातार बिगड़ रहे हों, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
बार-बार सर्दी होना क्या कमजोर इम्यूनिटी का संकेत है?
कुछ लोगों को साल में कई बार सर्दी-जुकाम होता है। ऐसे में उन्हें लगने लगता है कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है। हालांकि, डॉ. जयंत ठाकुरिया के मुताबिक, बार-बार सर्दी होना हमेशा कमजोर इम्यूनिटी का संकेत नहीं होता।
एक सामान्य वयस्क को साल में दो से तीन बार सर्दी-जुकाम होना आम बात है। बच्चों में इसकी आवृत्ति इससे अधिक हो सकती है। बार-बार संक्रमण होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें बीमार लोगों के संपर्क में आना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर अधिक समय बिताना, पर्याप्त नींद नहीं लेना, तनाव, धूम्रपान और खानपान में पोषक तत्वों की कमी शामिल हैं।
कई बार एलर्जी भी बार-बार सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण पैदा करती है, जबकि वास्तव में कोई संक्रमण नहीं होता। इसलिए केवल सर्दी-जुकाम की आवृत्ति के आधार पर इम्यूनिटी को कमजोर मान लेना सही नहीं है। अगर संक्रमण बहुत बार हो रहा है, लंबे समय तक ठीक नहीं होता या इसके साथ गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
सर्दी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें
मौसम बदलने के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
- खाना खाने से पहले और बाहर से घर लौटने के बाद साबुन से हाथ धोएं।
- संतुलित भोजन करें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
- रात में पूरी नींद लें और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें।
- धूल, धुएं और प्रदूषण के संपर्क को कम करने की कोशिश करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाएं न लें।
- तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लगातार बिगड़ते लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम होना आम है, लेकिन हर बार इसके पीछे एक ही वजह नहीं होती। वायरल संक्रमण और मौसमी एलर्जी के बीच अंतर समझना, जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना और रोजमर्रा की सावधानियां अपनाना ही बेहतर बचाव का तरीका है।