लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नाम पर एक नया पोस्टर चर्चा में है। पोस्टर में उनके पिछले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान लैपटॉप वितरण योजना को याद करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और GenZ के सपनों को भविष्य की राजनीति से जोड़ा गया है।
पोस्टर पर लिखा है-‘17 में जो रह गए थे अधूरे, 27 में वो हर काम होंगे पूरे।’
यह पोस्टर संतकबीरनगर जिले की मेंहदावल विधानसभा सीट से जुड़े सपा नेता जयराम पाण्डेय ने लगवाया है। पोस्टर का संदेश केवल जन्मदिन की बधाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदों और युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश भी दिखाई देती है।
लैपटॉप क्रांति से AI तक, युवाओं को साधने की कोशिश
पोस्टर के ऊपरी हिस्से में दो प्रमुख स्लोगन लिखे गए हैं। पहला है-‘जिसकी लैपटॉप क्रांति ने बदली प्रदेश की पहचान’ और दूसरा-‘और वही AI युग में देगा GenZ के सपनों को उड़ान।’
इन नारों के जरिए अखिलेश यादव सरकार के दौरान विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित करने की योजना को याद दिलाया गया है। इसके साथ ही AI और नई तकनीक को युवाओं के भविष्य से जोड़कर पेश किया गया है।
पोस्टर पर अंग्रेजी में ‘To Empower The Youth & Drive The Gain’ भी लिखा है। साथ ही #AkhileshAgain हैशटैग के जरिए अखिलेश यादव की दोबारा सत्ता में वापसी की राजनीतिक उम्मीद का संकेत दिया गया है।
‘17 में अधूरे काम, 27 में पूरे’, सीधे 2027 के चुनाव पर नजर
पोस्टर की सबसे अहम पंक्ति ‘17 में जो रह गए थे अधूरे, 27 में वो हर काम होंगे पूरे’ है। साल 2017 में समाजवादी पार्टी की सरकार का कार्यकाल समाप्त हुआ था, जबकि 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होना है।
ऐसे में इस नारे को सपा सरकार के पिछले कार्यकाल की योजनाओं और भविष्य में सत्ता में वापसी के दावे से जोड़कर देखा जा सकता है। पोस्टर में लैपटॉप योजना को प्रमुखता देना भी इसी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इसके जरिए विद्यार्थियों, युवाओं और तकनीक से जुड़े मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, यह पोस्टर जयराम पाण्डेय की ओर से दिया गया राजनीतिक संदेश है। इसे समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित आधिकारिक चुनावी घोषणा-पत्र या औपचारिक चुनावी वादे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
संस्कृत श्लोक से जन्मदिन की बधाई
पोस्टर के निचले हिस्से में संस्कृत के जरिए अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गई हैं। इसमें लिखा है—
“शतायुष्मान् भवतु। सुखं, समृद्धिः, आरोग्यं च सदैव। जन्मदिवसस्य अनेकशः शुभकामनाः।”
इस संदेश के माध्यम से अखिलेश यादव के दीर्घायु, सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की गई है। पोस्टर में एक ओर पारंपरिक संस्कृत शुभकामना है, तो दूसरी ओर AI और GenZ जैसे आधुनिक तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
अखिलेश यादव का ‘वास्तविक जन्मदिन’ क्यों चर्चा में रहता है?
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता 23 अक्टूबर को भी अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाते हैं और इस मौके पर पोस्टर व होर्डिंग लगवाते हैं। हालांकि, आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1973 दर्ज है। पिछले वर्षों में भी अक्टूबर में उनके जन्मदिन के अवसर पर जयराम पाण्डेय के लगवाए पोस्टर चर्चा में रहे हैं।
इस बार पोस्टर में लैपटॉप योजना, AI और GenZ के साथ 2027 के चुनाव का संदेश जोड़कर इसे नया राजनीतिक रंग दिया गया है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के पोस्टर राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की रणनीति, समर्थकों के उत्साह और चुनावी नारों को लेकर चर्चा बढ़ाते हैं।
फिलहाल, ‘17 में जो रह गए थे अधूरे, 27 में वो हर काम होंगे पूरे’ का नारा सपा समर्थकों की ओर से अखिलेश यादव की वापसी की उम्मीद को सामने रखता है। अब देखना होगा कि 2027 के चुनाव से पहले युवाओं और तकनीक पर केंद्रित यह संदेश राजनीतिक चर्चा में कितनी जगह बनाता है।