- कानपुर में कथित पुलिस उत्पीड़न का मामला गरमाया,
- पुलिस कमिश्नर से मुलाकात नहीं होने पर कांग्रेस के विधि एवं मानवाधिकार विभाग ने दी धरने की चेतावनी
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अंकित कनौजिया के खिलाफ दर्ज कथित आपराधिक मुकदमों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ गया है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि पिछले चार-पांच दिनों से उनके घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा था। इस दौरान पानी का कनेक्शन काटने और परिवार के सदस्यों के साथ बार-बार अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
मामले में कांग्रेस के विधि एवं मानवाधिकार विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। इसके बाद अंकित कनौजिया के घर के बाहर से पुलिस बल हटा लिया गया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विधि एवं मानवाधिकार विभाग के अध्यक्ष आसिफ रिजवी रिंकू वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इस मामले को लेकर कानपुर पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने अंकित कनौजिया के परिवार की शिकायतों को उठाते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल किए।
हालांकि, पुलिस कमिश्नर से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद आसिफ रिजवी रिंकू ने धरने पर बैठने की चेतावनी दी, जिसके बाद एडिशनल कमिश्नर के साथ वार्ता हुई।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
वार्ता के दौरान आसिफ रिजवी रिंकू ने पुलिस बल की मौजूदगी में अपना पक्ष रखते हुए मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कथित तौर पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने और परिवार को परेशान किए जाने से जुड़े आरोपों को उठाया।
घर के बाहर से हटाया गया पुलिस बल
वकीलों के प्रतिनिधिमंडल और पुलिस अधिकारियों के बीच वार्ता के बाद अंकित कनौजिया के घर के बाहर से पुलिस का पहरा हटा दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के विधि एवं मानवाधिकार विभाग ने इसे परिवार की शिकायतों को लेकर उठाई गई आवाज का परिणाम बताया।
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पुलिस किसी भी मामले में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करे और किसी परिवार को बिना उचित कारण परेशान न किया जाए। विभाग ने निष्पक्ष जांच, कानून के राज और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों पर पुलिस और संबंधित पक्षों का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों का बयान सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।