नई दिल्ली: सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटनों से कट-कट की आवाज आना कई लोगों के लिए आम बात है। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ लोगों को चिंता होती है कि कहीं यह हड्डियां कमजोर होने का संकेत तो नहीं। हालांकि, केवल घुटनों से आवाज आने का मतलब ऑस्टियोपोरोसिस होना नहीं है। लेकिन अगर आवाज के साथ दर्द, सूजन या अकड़न भी महसूस हो रही है, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं। जानिए घुटनों से आवाज आने की वजह क्या हो सकती है और किन लक्षणों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
घुटनों से कट-कट की आवाज क्यों आती है?
यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग के डॉ. अमित शर्मा के मुताबिक, घुटनों के जोड़ से आवाज आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में क्रेपिटस कहा जाता है।
कई बार जोड़ के भीतर गैस के बुलबुलों में होने वाले बदलाव या टेंडन और लिगामेंट के हिलने से ऐसी आवाज सुनाई देती है। उम्र बढ़ने के साथ घुटनों पर दबाव बढ़ने और कार्टिलेज यानी जोड़ के बीच मौजूद मुलायम परत के घिसने से भी आवाज आ सकती है। ऐसी स्थिति में जोड़ की सतहों में घर्षण बढ़ सकता है।
इसलिए हर बार घुटनों से आवाज आने को गंभीर बीमारी का संकेत नहीं माना जाता। इसकी वजह जानने के लिए आवाज के साथ होने वाले दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
क्या घुटनों की आवाज का मतलब ऑस्टियोपोरोसिस है?
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें बोन डेंसिटी यानी हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ सकता है। इस बीमारी में पुरानी हड्डी के टूटने और नई हड्डी बनने की प्रक्रिया के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस की एक अहम बात यह है कि शुरुआती चरण में आमतौर पर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। केवल घुटनों से कट-कट की आवाज आने के आधार पर इस बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि यह आवाज ऑस्टियोपोरोसिस का विशिष्ट लक्षण नहीं है।
अगर डॉक्टर को हड्डियों के कमजोर होने का संदेह हो, तो वे जरूरत के मुताबिक बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच से हड्डियों के घनत्व का आकलन किया जाता है।
कब घुटनों की आवाज बन सकती है खतरे की घंटी?
अगर घुटनों से कभी-कभार आवाज आती है और उसके साथ दर्द या दूसरी परेशानी नहीं होती, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन आवाज बार-बार आने लगे या रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
खासतौर पर इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:
- घुटनों से आवाज आने के साथ दर्द होना
- जोड़ में सूजन दिखाई देना
- घुटनों में अकड़न या उन्हें मोड़ने में परेशानी होना
- सीढ़ियां चढ़ने-उतरने या चलने में तकलीफ होना
- लक्षण लगातार बने रहना या धीरे-धीरे बढ़ना
ऐसे लक्षणों की वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी जोड़ से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।
अगर घुटने में अचानक तेज दर्द या काफी सूजन हो जाए, वह लाल या गर्म महसूस हो अथवा उस पर वजन रखना मुश्किल हो, तो जल्द चिकित्सकीय मदद लें।
घुटनों और हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और शरीर के वजन को नियंत्रित रखना अहम है। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम मददगार हो सकते हैं। हालांकि, व्यायाम करते समय दर्द बढ़े तो उसे जबरदस्ती जारी न रखें।
खाने में दूध, दही और पनीर जैसे कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन डी भी जरूरी है। इसकी कमी या किसी अन्य पोषण संबंधी समस्या का संदेह होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
ध्यान रखें कि घुटनों से आने वाली आवाज अपने आप में किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं करती। लेकिन अगर इसके साथ दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी हो, तो समय पर जांच कराना जरूरी है।