क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के खिलाफ अपने ही बनाए सबसे सख्त कानून को लागू करने से ठीक पहले पीछे हट गए हैं? जिस कड़े फैसले से दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मचने वाला था और भारत-चीन जैसे देशों की धड़कनें तेज हो गई थीं, उस पर अचानक रोक लगाकर ट्रंप ने आखिर क्या नया दांव चला है? जानिए इस चौंकाने वाले फैसले की पूरी कहानी, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है।
100% टैरिफ के खौफ से राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और टैरिफ में छूट देने का फैसला किया है। ट्रंप ने एक आदेश जारी कर यह जानकारी दी। ये प्रतिबंध और शुल्क उसी कानून के तहत लागू होने थे, जिस पर ट्रंप ने पिछले महीने दस्तखत किए थे। हालांकि, इनके लागू होने से कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने कई नियमों में छूट दे दी। ट्रंप के इस फैसले से भारत और चीन समेत कई देशों को बड़ी राहत मिली है।
भारत रूस से तेल खरीदने वाले दुनिया के बड़े देशों में शामिल है, इसलिए भारत और चीन समेत कई देशों ने इस कानून को लेकर चिंता जताई थी। अगर इन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जाता, तो उनके अमेरिकी बाजार में कारोबार पर काफी असर पड़ सकता था। बता दें कि रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं।
क्या था ‘लिंडसे ग्राहम एक्ट‘?
इस कानून को अमेरिकी संसद में आगे बढ़ाने वाले प्रमुख नेता सीनेटर लिंडसे ग्राहम थे, जिनका अब निधन हो चुका है। ट्रंप ने सितंबर में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के कानून पर दस्तखत किए थे।
इस कानून का मुख्य मकसद रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़ा आर्थिक दबाव बनाना था। इसके मुताबिक, रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 30 दिनों के भीतर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। यह नियम उन देशों पर भी लागू हो सकता था, जो कानून बनने के 30 दिन बाद भी जानबूझकर रूस से तेल या गैस खरीदते। इसके अलावा, रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों पर भी यह कार्रवाई हो सकती थी।
‘राष्ट्रीय हित’ और बदलता राजनीतिक रुख
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आदेश में ट्रंप ने कहा, ‘मैंने संसद को एक प्रमाण-पत्र सौंपा है कि इस समय इस तरह की छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।’ व्हाइट हाउस की ओर से शुक्रवार को जारी इस आदेश से ट्रंप ने कई प्रतिबंधों और शुल्कों को प्रभावी होने से पहले ही टाल दिया। हालांकि, उपलब्ध बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दी गई है।
ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस को लेकर उनका रुख काफी नरम होता दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, वह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सार्वजनिक रूप से आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप ने यह बयान भी दिया है कि यूक्रेन को नया नेता चुनने की जरूरत है।