जब क्रीज पर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खड़े हों, या फिर टी-20 में अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन छक्कों की बारिश कर रहे हों, तो दिल खुशी से झूम उठता है। ऐसा लगता है कि विरोधी टीम की खैर नहीं! मौजूदा वेस्टइंडीज दौरे पर भारतीय बल्लेबाजों का जलवा कुछ ऐसा ही है-वनडे हो या टी-20, हमारे धुरंधर रनों का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं।
लेकिन, जैसे ही पारी पलटती है और भारतीय गेंदबाज मैदान पर उतरते हैं, सारा रोमांच डर में बदल जाता है। स्टेडियम में गूंजती जीत की उम्मीदें अचानक सन्नाटे में तब्दील हो जाती हैं। हाल ये है कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाज हमारी गेंदबाजी को देखकर मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।
जब 400 रन और 200+ का टारगेट भी लगने लगे छोटे
क्रिकेट के खेल में अक्सर कहा जाता है कि “बल्लेबाज मैच जिताते हैं, और गेंदबाज टूर्नामेंट।” लेकिन जब गेंदबाज ही हर मैच में अपनी लय खो बैठें, तो दुनिया का सबसे मजबूत बल्लेबाजी क्रम भी लाचार नजर आने लगता है।
वेस्टइंडीज के मौजूदा दौरे पर यही दर्दनाक हकीकत सामने आ रही है:
- वनडे सीरीज का हाल: जहां एक तरफ टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने रनों का अंबार लगाया, वहीं दूसरी तरफ कैरिबियाई बल्लेबाजों ने आसानी से 400 से ज्यादा रनों के लक्ष्य को भी बौना साबित कर दिया।
- टी-20 सीरीज का हाल: कप्तान श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा और युवा शेरों की आतिशी पारियों के दम पर हमने बड़े स्कोर बनाए, लेकिन हमारे गेंदबाज 200 से ऊपर के टारगेट का बचाव करने में भी नाकाम रहे। मैदान पर चौकों-छक्कों की ऐसी बरसात हुई कि ऐसा लगा मानो पिच नहीं, बल्कि हमारे गेंदबाजों की रणनीति और हौसले दोनों पस्त हो गए हैं।
सुनील गावस्कर ने गेंदबाजों की क्लास लगाते हुए खोली पोल
क्रिकेट के मैदान पर जब गेंदबाज पिटते हैं, तो सबसे पहले उंगलियां पिच की तरफ उठने लगती हैं—”पिच सपाट है”, “गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं है”, या “बल्लेबाजों की मददगार पिच है।” लेकिन क्या हर बार पिच ही दोषी होती है? भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने इस पुराने बहाने की हवा निकाल दी है।
हाल ही में जियोहॉटस्टार पर खेल की समीक्षा करते हुए सुनील गावस्कर ने भारतीय और विश्व क्रिकेट के गेंदबाजों को आईना दिखाया है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि जब गेंदबाज खुद खराब गेंदबाजी करेंगे, तो इसमें पिच की क्या गलती है?
“फुलटॉस पर पिच का क्या दोष?” – गावस्कर का सीधा सवाल
सुनील गावस्कर ने अपनी बेबाक शैली में गेंदबाजों की क्लास लेते हुए कहा,
“हम अक्सर पिचों की बात करते हैं और उन्हें दोष देते हैं कि वे गेंदबाजों की मदद नहीं कर रही हैं। लेकिन अगर आप फुलटॉस गेंदें डालेंगे, तो इसमें पिच का क्या दोष है?”
गावस्कर का यह बयान उन गेंदबाजों के लिए एक जोरदार तमाचा है जो अक्सर अपनी नाकामी का ठीकरा पिच या परिस्थितियों पर फोड़ देते हैं। उनका साफ मानना है कि जब गेंदबाजी की बुनियादी चीजें (बेसिक) ही गलत होंगी, तो दुनिया की कोई भी पिच गेंदबाज का साथ नहीं दे सकती।
सही लेंथ और यॉर्कर से मिलती है सफलता
वेस्टइंडीज दौरे और हालिया मैचों का हवाला देते हुए गावस्कर ने बताया कि सफलता पाने के लिए जादुई पिचों की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही अनुशासन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को भी सफलता तब मिली, जब उन्होंने हवा में भटकने के बजाय सही लेंथ पर गेंदबाजी की और सटीक यॉर्कर का इस्तेमाल किया।
गावस्कर की इस दो टूक टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक दौर के गेंदबाजों को अपनी कमियों को छिपाने के लिए पिचों का बहाना बनाना बंद करना होगा। जब तक गेंदबाजी में अनुशासन, सही लेंथ और लाइन पर काम नहीं किया जाएगा, तब तक गेंदबाज बल्लेबाजों के सामने लाचार ही नजर आएंगे।
सबसे बड़ा सवाल: क्या जसप्रीत बुमराह के बिना अधूरी है गेंदबाजी?
हर भारतीय फैन के दिल में इस वक्त एक ही टीस है-“क्या हमारे पास जसप्रीत बुमराह के अलावा कोई मैच विनर गेंदबाज नहीं बचा है?”
बुमराह की गैरमौजूदगी में गेंदबाजी आक्रमण में वह पैनापन और खौफ नजर नहीं आ रहा है, जो कभी विपक्षी बल्लेबाजों के दिलों में हुआ करता था। नई गेंद से विकेट निकालने की बात हो या डेथ ओवर्स में रन रोकने की, हमारे गेंदबाज हर मोर्चे पर संघर्ष करते दिख रहे हैं। न तो सही लाइन-लेथ दिख रही है और न ही दबाव बनाने की कोई कला।
खेल प्रेमियों का दिल: उम्मीद और निराशा का यह खेल
एक खेल प्रेमी के तौर पर यह देखना बेहद तकलीफदेह होता है कि जब हमारे बल्लेबाज अपनी जान लगाकर मैदान पर रन बनाते हैं, तो हमारी गेंदबाजी उसे एक झटके में पानी फेर देती है। सोशल मीडिया पर भी फैंस का गुस्सा फूट पड़ा है—कोई कह रहा है कि “पिच में कोई खराबी नहीं है, हमारी गेंदबाजी ही घटिया हो चुकी है,” तो कोई मान रहा है कि इस गेंदबाजी अटैक के साथ किसी भी बड़ी टीम को हराना नामुमकिन है।
क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, यह जज्बे और भावनाओं का संगम है। भारतीय टीम के पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर गेंदबाजी की इस कमजोरी को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो जीत की हर उम्मीद ऐसे ही बीच रास्ते में दम तोड़ती रहेगी।
अब सवाल यह है कि क्या टीम प्रबंधन इस बड़ी चूक से सबक लेगा या फिर फैंस को हर बार ऐसे ही दिल टूटने का दर्द सहना पड़ेगा?