उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अयोध्या का रण सबसे बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ गया है, जिसकी मुख्य वजह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच छिड़ी आमने-सामने की जंग है। अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दिए जाने के बाद, अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल जुबानी जंग के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है कि क्या वाकई 2027 के चुनाव में अयोध्या की धरती पर दोनों दिग्गज आमने-सामने होंगे?
अखिलेश यादव ने दी थी खुली चुनौती
बीती 8 अक्टूबर 2026 को सपा प्रमुख अखिलेश यादव अयोध्या दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान वे शहर में आयोजित एक श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए और इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा सरकार पर तीखा निशाना साधा। अखिलेश यादव ने सीएम योगी को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें इतना आत्मविश्वास है, तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़कर दिखाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी द्वारा पवन पांडेय को अयोध्या से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से भाजपा लगातार सर्वे करा रही है और हर सर्वे में वह पिछड़ती नजर आ रही है। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि भाजपा को अब अयोध्या में चुनाव लड़ाने के लिए नया उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है।
सीएम योगी ने दिया पलटवार
अखिलेश यादव की इस चुनौती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बलरामपुर स्थित मां देवीपाटन धाम की नगरी से जोरदार पलटवार किया। सीएम योगी ने चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा, “आइए, आप भी अयोध्या में नामांकन करिए और मैं भी अयोध्या से नामांकन करता हूं। चलो, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं, तय हो जाए… आप भी आइए, मैं भी आता हूं।”
मुख्यमंत्री ने आगे तंज कसते हुए कहा, “लड़ाई चेलों से क्यों? हम तो गुरु से ही लड़ेंगे।” उन्होंने माफियाओं और पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने वाले लोग क्या हमसे लड़ पाएंगे?
“अयोध्या हमारे लिए पावन धाम”–सीएम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अयोध्या उनके लिए पावन धाम है और वे वहां बार-बार इसलिए जाते हैं ताकि देश की पहचान पर कोई कलंक न लग सके।उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए आगे कहा, “चुनाव लड़ना है तो चेलों से क्यों, आइए आप भी नामांकन कीजिए और हम भी नामांकन करते हैं।
अपनी किस्मत आजमाइए, फिर देखिए कि अयोध्या किसके साथ है।” सीएम ने पुरानी सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग पहले अयोध्या को तीन से चार घंटे बिजली देते थे और ‘श्री राम’ बोलने वालों पर पाबंदी व बैरियर खड़े करते थे, आज वे लोग भी चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं।
बयानबाजी के इस दौर के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या यह जुबानी जंग सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगी या वाकई 2027 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या की सीट पर उत्तर प्रदेश के ये दो बड़े सियासी धुरंधर आमने-सामने चुनावी मैदान में उतरेंगे।