नवरात्रि और अमावस्या के पावन अवसर पर जहाँ माँ चंद्रिका देवी के दरबार में लाखों भक्तों का सैलाब उमड़ता था, वहीं इस बार मंदिर परिसर में पसरे सन्नाटे और कमर तक भरे पानी ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। गोमती नदी के रौद्र रूप और चारों तरफ फैले जलभराव के बीच अचानक श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आखिर क्या हैं मंदिर परिसर के मौजूदा हालात और कब तक माँ के दर्शन के लिए भक्तों को करना होगा इंतजार?
गोमती के उफान से जलमग्न हुआ मंदिर परिसर
लखनऊ के बीकेटी (बक्शी का तालाब) स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ चंद्रिका देवी मंदिर के मुख्य रास्तों और परिसर के चारों ओर बाढ़ का पानी भर गया है।
गोमती नदी के बढ़े जलस्तर के कारण मंदिर जाने वाले मार्गों पर तेज बहाव देखा जा रहा है। किसी भी अनहोनी या हादसे से बचाव के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं।
बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
अमावस्या और आगामी नवरात्र मेले की तैयारियों के मद्देनजर चंद्रिका देवी मेला विकास समिति और पुलिस प्रशासन के बीच एक अहम बैठक हुई।
एमएलसी पवन सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।
कपाट बंद, पर जारी रहेगी रोज की आरती
मेला विकास समिति के महामंत्री अनुराग तिवारी ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने भक्तों से अपील की है कि वे जोखिम उठाकर मंदिर की ओर न आएं। हालांकि, मंदिर में रोज की तरह तय समय पर पूजा-अर्चना और आरती की परंपरा जारी रहेगी।
कब फिर से शुरू होंगे दर्शन?
समिति और प्रशासन का कहना है कि जैसे ही नदी का जलस्तर कम होगा और मुख्य मार्गों से पानी हटेगा, सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करके दर्शन फिर से बहाल कर दिए जाएंगे। तब तक के लिए श्रद्धालुओं से पुलिस व प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया गया है।
नवरात्रि के दौरान माँ चंद्रिका देवी मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और यहां भव्य मेला भी लगता है। लेकिन इस बार गोमती नदी के उफान और जलभराव के चलते श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए दर्शन पर रोक लगाई गई है। ऐसे में भक्तों को पानी कम होने और प्रशासन की अनुमति मिलने तक इंतजार करना होगा।