मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान लोगों ने बुधवार को प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। वार्ड-60 के लोग बंदरों के मुखौटे लगाकर कमिश्नरी पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बंदरों को पकड़ने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इलाके में पिछले करीब दो महीने से 200 से 300 बंदरों के झुंड घूम रहे हैं, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
पानी की टंकियां तोड़ने से लेकर कपड़े फाड़ने तक का आरोप
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बंदर दिन-रात सड़कों और घरों के आसपास डेरा जमाए रहते हैं। कई घरों की पानी की टंकियां तोड़ने और कपड़ों समेत दूसरे सामान को नुकसान पहुंचाने की शिकायत भी लोगों ने की है। लोगों के मुताबिक, बंदरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि आए दिन उनके उत्पात का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा पार्षद रेखा सिंह और पूर्व पार्षद नीरज के नेतृत्व में वार्ड-60 के लोग कमिश्नरी पहुंचे। उन्होंने डीएम को ज्ञापन देकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग की। लोगों ने बताया कि इलाके में कई स्कूल भी हैं और इनके आसपास बड़ी संख्या में बंदर जमा रहते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में लगातार डर बना हुआ है।
पार्षद और उसके बेटे समेत कई लोगों को काटने का दावा
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि बंदरों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। उनका कहना है कि पिछले दिनों एक पार्षद और उसके बेटे को भी बंदरों ने काट लिया था। एक बुजुर्ग के साथ भी बंदर के काटने की बात कही गई है।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। इसी आशंका को लेकर उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम और वन विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
पूर्व पार्षद नीरज ने आरोप लगाया कि बंदरों की समस्या को लेकर नगर निगम और वन विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार नगर स्वास्थ्य अधिकारी और वन विभाग को फोन कर शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नीरज के मुताबिक, प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि उससे पहले ही बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
स्कूलों के आसपास भी मंडरा रहा खतरा
पूर्व पार्षद ने बताया कि मॉडर्न स्कूल, फॉरवेली स्कूल, जैमिनी-जैमिनी पब्लिक स्कूल और डेफोडिल स्कूल के आसपास बड़ी संख्या में बंदर देखे जा रहे हैं। उनका दावा है कि कई जगहों पर 200 से 300 बंदरों के झुंड दिखाई देते हैं।
बंदरों के डर से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना मुश्किल होने का दावा भी किया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
अधिकारियों का ध्यान खींचने के लिए पहने बंदरों के मुखौटे
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बंदरों के मुखौटे लगाकर प्रदर्शन करने का मकसद अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचना था। लोगों ने मांग की कि डीएम, नगर निगम और वन विभाग के अधिकारियों को एक साथ बैठाकर जिम्मेदारी तय की जाए और जल्द से जल्द बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जाए।