लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। फीनिक्स पलासियो मॉल के पास भी गोमती नदी का पानी ओवरफ्लो होने की स्थिति सामने आई है। बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम तेज कर दिया गया है। जहां से पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर रहा है, वहां इसे रोकने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
12 अस्थायी रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों के ठहरने की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। अब तक 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा 90 नावों के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाने के साथ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।
जरूरतमंद लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार राहत कार्य किया जा रहा है।
150 एकड़ इलाके में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव
जलभराव वाले इलाकों में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के जरिए एंटी लार्वा और एमएलओ का छिड़काव किया जा रहा है। सफाई व्यवस्था के लिए 250 सफाईकर्मियों को लगाया गया है।
प्रशासन का फोकस जलभराव के साथ-साथ साफ-सफाई और लोगों को संभावित स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाने पर भी है।
लोहरामऊ से मिल्लत नगर तक अधिकारियों ने किया निरीक्षण
अधिकारियों ने लखनऊ के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत अलग-अलग प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान कर्मचारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत व्यवस्था के तहत प्रभावित इलाकों में करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। इसके साथ ही 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि लोगों को पीने के पानी की परेशानी न हो।
प्रभावित इलाकों में लगातार जारी है राहत और रेस्क्यू
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचे पानी को रोकने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है। प्रशासन की ओर से नावों के जरिए रेस्क्यू और राहत सामग्री पहुंचाने के साथ अस्थायी ठहरने, पेयजल और सफाई की व्यवस्था की जा रही है। प्रभावित इलाकों में अधिकारियों और कर्मचारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।