क्या आप भी सस्ते होम लोन की तलाश में हैं या किसी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने का मन बना रहे हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। देश में होम लोन की डिमांड आसमान छू रही है, लेकिन बैंकों की अपनी उधारी सीमाओं (Lending Limits) के चलते बाजार में पैसों का संकट सा दिखने लगा है। इसी बीच, बाजार में एक बड़ी हलचल मची है—नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग फंड और रीफाइनेंस के पिटारे को दोगुना करने की बड़ी तैयारी कर ली है। आखिर क्यों अचानक यह कदम उठाया गया है और इससे आम लोगों व कंपनियों को क्या फायदा होगा?
बैंकों के कर्ज देने की सीमा हुई खत्म
मौजूदा समय में होम लोन की भारी मांग के बावजूद हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के सामने सबसे बड़ा रोड़ा कमर्शियल बैंकों की ‘आंतरिक उधारी सीमा’ (Internal Exposure Limit) बन गया है। नियम के मुताबिक, बैंक एनबीएफसी (NBFCs) और एचएफसी को एक तय सीमा से ज्यादा कर्ज नहीं दे सकते। जब यह लिमिट पूरी हो जाती है, तो कंपनियों के हाथ बंध जाते हैं।
हालाँकि, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी इस बाजार में घटी है और बैंक ही सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं, लेकिन कंपनियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अब नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) मसीहा बनकर सामने आ रहा है। एनएचबी के इस कदम से कंपनियों की बैंकों पर निर्भरता कम होगी और वे बिना किसी रुकावट के होम लोन बांट सकेंगी।
बेहद सस्ती ब्याज दरों का खेल: सामान्य कर्ज से 4% तक सस्ता फंड
एनएचबी से मिलने वाले फंड की सबसे बड़ी खासियत इसकी मक्खन जैसी सस्ती ब्याज दरें हैं:
सामान्य रीफाइनेंस दर: लगभग 7.65% के आसपास।
अफोर्डेबल हाउसिंग फंड: इसकी दर मात्र 4.25% के करीब बैठती है।
ग्रीन और दूरदराज के इलाके: ग्रीन हाउसिंग और पिछड़े इलाकों के लिए मिलने वाला खास फंड तो सामान्य रीफाइनेंस से भी करीब 30 बेसिस पॉइंट्स सस्ता पड़ता है।
कम लागत के इस अंतर के कारण अनुमान है कि एनएचबी इस साल कुछ चुनिंदा हाउसिंग कंपनियों की कुल उधारी का 30 से 35 फीसदी हिस्सा अकेले पूरा कर सकता है, जो पिछले साल 20 से 25 फीसदी के दायरे में था।
किन दिग्गज कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा?
एनएचबी के इस मास्टरस्ट्रोक से देश की कई नामी-गिरामी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की बांछें खिलने वाली हैं। इस लिस्ट में मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:
- एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Housing Finance)
- बजजा हाउसिंग फाइनेंस (Bajaj Housing Finance)
- पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस (PNB Housing Finance)
- आधार हाउसिंग फाइनेंस (Aadhar Housing Finance)
- ट्रूहॉम फाइनेंस (TrueHome Finance)
‘ट्रिपल ए’ (AAA) क्रेडिट रेटिंग वाली संस्था एनएचबी के इस फैसले से न केवल इन कंपनियों को लंबी अवधि के लिए सुरक्षित और सस्ता फंड मिलेगा, बल्कि देश के 40.07 लाख करोड़ रुपये के कुल होम लोन बाजार (जिसमें एचएफसी की हिस्सेदारी 18.6% यानी 7.44 लाख करोड़ रुपये है) में ग्रोथ को पंख लग जाएंगे। अब देखना यह है कि इस फैसले पर आधिकारिक मुहर लगने के बाद होम लोन बाजार में कितनी तेजी आती है।