चंडीगढ़: 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपने प्रमुख चेहरे के तौर पर सामने करना शुरू कर दिया है। चंडीगढ़ से जालंधर और फिर कपूरथला की ओर जाते समय सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग में मान पीली पगड़ी में मुस्कुराते नजर आते हैं। इन पर ‘ईमानदार CM’, ‘लोगों के CM’ और ‘AAP का एक ही नारा, भगवंत मान दोबारा’ जैसे संदेश लिखे हैं। यह तस्वीर 2021 के आखिर से अलग है, जब पंजाब में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के होर्डिंग ज्यादा दिखाई देते थे।
बाद में पार्टी ने फोन सर्वे के जरिए भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद का चेहरा चुना था। ‘जनता चुनेगी अपना CM’ नाम से कराए गए इस सर्वे में 93 फीसदी लोगों ने मान के पक्ष में मतदान किया था।
2027 के लिए भगवंत मान पर AAP का पूरा फोकस
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। अब 2027 के चुनाव की तैयारी में पार्टी ने भगवंत मान को अपने प्रमुख चेहरे के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल (बादल) को छोड़कर पंजाब की ज्यादातर प्रमुख पार्टियों ने अभी अपने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई है।
हालांकि, भगवंत मान को पार्टी का मुख्य चेहरा बनाने के साथ उनके कामकाज और सरकार पर राजनीतिक निगाह भी बढ़ गई है। सोमवार को उस समय सरकार के सामने एक नया विवाद खड़ा हुआ, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
यह मामला पंजाब पुलिस की ओर से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पंजाब के डीजीपी को भेजे गए तीन पन्नों पर कार्रवाई नहीं किए जाने से जुड़ा है। आरोपों में मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। मंगलवार शाम सीबीआई ने घुमन के घर और मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पर छापेमारी की। इससे पहले पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जांच के बीच भी लगातार जनता के बीच मान
इस विवाद के बीच भगवंत मान लगातार पंजाब के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। वह लगभग हर दिन लोगों के बीच दिखाई दे रहे हैं। सिर्फ जुलाई की शुरुआत में उन्होंने थोड़े समय का ब्रेक लिया था। उस दौरान वह अपने सालाना स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु गए थे।
इलाके के हिसाब से उनके भाषणों के मुद्दे बदलते हैं, लेकिन दो योजनाओं का जिक्र लगातार होता है। इनमें हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए ‘मावां-धीआं सतकार योजना’ के तहत आर्थिक सहायता शामिल है। बिजली के बिल आम तौर पर दो महीने में आने के कारण होर्डिंग और भाषणों में इसे 600 यूनिट के तौर पर भी बताया जाता है।
महिलाओं के लिए यह योजना 1 जुलाई से शुरू हुई है। इसके तहत पात्र दलित महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये और अन्य पात्र महिलाओं को 1000 रुपये दिए जा रहे हैं। योजना के तहत पहली बार 1 जुलाई को तीन महीने की राशि दी गई थी, जबकि दूसरी किस्त 1 अक्टूबर को दी गई।
मान ने कहा है कि मोबाइल पर पैसे आने की ‘टूं-टूं’ वाली आवाज बंद नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि भगवंत मान महिलाओं को पैसे देकर सिर पर चढ़ा रहे हैं… लेकिन यह टूं-टूं चलती रहेगी, बंद नहीं होने दूंगा।”
नहर का पानी, स्वास्थ्य बीमा और विपक्ष पर निशाना
ग्रामीण इलाकों में मुख्यमंत्री नहर के पानी की पहुंच बढ़ने और सभी लोगों के लिए 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की भी बात करते हैं। उनके मुताबिक, पंजाब में नहर के पानी की पहुंच 2022 में 26 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई है।
सरकार के कई होर्डिंग पर ‘जो किया, सो करके दिखाया’ लिखा दिखाई देता है। वहीं भगवंत मान के भाषणों में विपक्ष पर किए जाने वाले तंज भी प्रमुखता से सुनाई देते हैं।
2 अक्टूबर को पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से तीन बार विधायक रहे परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने पर मान ने कहा, “मैं उन्हें हमेशा ‘कैप्टन साहब’ कहता हूं। उम्मीद है कि उनकी टीम भी उन्हें गेंद पास करेगी क्योंकि पास के बिना गोल नहीं हो सकता।”
कांग्रेस को लेकर उनका एक और तंज रहा, “कांग्रेस में कार्यकर्ताओं से ज्यादा मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं।” एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “कांग्रेस और अकालियों का पांच सूत्री कार्यक्रम याद रखिए- मैं, मेरा बेटा, मेरा भतीजा, मेरा बहनोई और मेरी बहन का पति।”
मान लोगों से यह भी कहते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल पैसे बांट सकते हैं। उनका कहना है कि पैसे ले लेना, लेकिन वोट आम आदमी पार्टी को देना।
नशे के मुद्दे पर BJP को मान का जवाब
पंजाब में नशे का कारोबार भी 2027 के चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। भाजपा के नेतृत्व में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साध रहा है।
भगवंत मान इस पर पिछली अकाली दल-भाजपा सरकार को घेरते हैं। उनका कहना है कि पंजाब में नशे की समस्या उस दौर में बढ़ी। साथ ही वह केंद्र की भाजपा सरकार को भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी की याद दिलाते हैं।
पंजाब की पाकिस्तान से लगने वाली 500 किलोमीटर से ज्यादा लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को नशे की तस्करी के रास्तों में से एक माना जाता है। मान इसी मुद्दे को उठाकर केंद्र की भूमिका पर सवाल करते हैं।
होर्डिंग में मान का चेहरा, ‘दिल्ली से कंट्रोल’ के आरोप का जवाब?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के इन होर्डिंग का एक मकसद उस आरोप का जवाब देना भी है कि पार्टी दिल्ली से अरविंद केजरीवाल के जरिए संचालित होती है।
होर्डिंग में मुख्यमंत्री भगवंत मान को प्रमुखता दी जा रही है। साथ ही उनकी लोगों के बीच मौजूदगी और साफ-सुथरी छवि पर जोर दिया जा रहा है। 2021 के आखिर में जहां पंजाब में केजरीवाल के होर्डिंग ज्यादा दिखाई देते थे, वहीं अब पार्टी के प्रचार में मान का चेहरा केंद्र में है।
CBI जांच के आदेश के बाद ‘ईमानदार CM’ वाली छवि पर सवाल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद विपक्ष ने भगवंत मान की साफ-सुथरी छवि को लेकर सवाल उठाए हैं। मान इसे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से उन्हें बदनाम करने की कोशिश बता रहे हैं।
विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री इस मामले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में क्या हो रहा था, इसकी जानकारी उन्हें कैसे नहीं थी। बाजवा ने यह भी पूछा कि अगर आम आदमी पार्टी सरकार उन्हें ‘ईमानदार’ मुख्यमंत्री बताती है तो हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश क्यों दिया।
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इससे आगे बढ़कर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
ग्रामीण पंजाब में आरोपों पर अभी स्पष्ट राय नहीं
हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इस मामले को लेकर लोग तत्काल किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। कपूरथला के बागड़ियां गांव के रहने वाले अजीब सिंह पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद से चार महीने पहले रिटायर हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक आरोपों के पुख्ता सबूत सामने नहीं आते, तब तक इस मामले पर कुछ कहना मुश्किल है।
बारियार गांव के रिटायर्ड सैनिक गुरचरण सिंह भी इसी तरह की राय रखते हैं। उन्होंने कहा, “आरोप और जवाबी आरोप राजनीति का हिस्सा हैं। जब तक उनकी पुष्टि करने वाले सबूत नहीं हों, इनका कोई मतलब नहीं है।”
फिलहाल भगवंत मान लगातार जनता के बीच जाकर सरकार की योजनाओं और अपने कामकाज को सामने रख रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मुद्दा दिया है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भगवंत मान की राजनीतिक भूमिका और उनकी छवि दोनों ही पंजाब की सियासत में चर्चा के केंद्र में हैं।