नई दिल्ली: राधा अष्टमी का पर्व आज, 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार का राधा भक्तों के लिए विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा, आरती और नाम जप करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर पूजा-पाठ के साथ कुछ ऐसी बातों का भी ध्यान रखा जाता है, जिन्हें धर्म-शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
राधा अष्टमी पर क्या-क्या करें?
राधा अष्टमी के दिन राधा रानी की पूजा के साथ भगवान श्रीकृष्ण के युगल स्वरूप की आराधना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है।
- राधा रानी को भोग लगाएं: पूजा में मालपुआ, रबड़ी और माखन-मिश्री अर्पित करें। ब्रज की मान्यता के अनुसार, राधा रानी को दही-अरबी की सब्जी भी प्रिय है। इसे भी भोग में शामिल किया जा सकता है।
- कथा और आरती करें: राधा रानी की पूजा के दौरान उनकी कथा पढ़ें और श्रद्धापूर्वक आरती गाएं।
- राधा रानी के 28 नामों का जप करें: धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा रानी के 28 नामों का जप करने से परम सुख की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- नाम जप और कीर्तन करें: इस दिन राधा नाम का स्मरण करते हुए भक्ति और कीर्तन में मन लगाएं।
राधा अष्टमी की आरती
आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानु लली की… ॥
मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि।
अविरल प्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानु लली की… ॥
संत संत सेव्य सत मुनि जन की, आकर अमित दिव्य गुण गण की।
आकर्षक श्री कृष्ण तन मन की, अति अमूल्य संपत्ति समता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानु लली की… ॥
कृष्णात्मिका कृष्ण सहचारणी, जग जननी जग दुख निवारणी।
आदि अनादि शक्ति विभवार्णि, छबि नवरंग नवीन वरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
राधा अष्टमी के दिन क्या न करें?
राधा अष्टमी पर पूजा-पाठ और व्रत के साथ कुछ बातों का ध्यान रखने की भी धार्मिक परंपरा है।
- केवल राधा रानी की पूजा न करें: धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। दोनों को एक-दूसरे से अभिन्न माना जाता है।
- तामसिक भोजन से बचें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर सात्विक भोजन करते हैं।
- नकारात्मक सोच और वाणी से बचें: इस दिन नकारात्मक बातें कहने और सोचने से बचने की सलाह दी जाती है। मन को राधा नाम के जप और कीर्तन में लगाना चाहिए।
राधा अष्टमी पर पूजा और भक्ति का विशेष महत्व
राधा अष्टमी को राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके युगल स्वरूप का स्मरण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा, आरती, नाम जप और भोग अर्पित करने से राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और सात्विक जीवनशैली अपनाकर जन्मोत्सव मनाते हैं।