नई दिल्ली: हमारे यहां घर का मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं माना जाता, बल्कि इसे घर की महत्वपूर्ण जगहों में से एक माना जाता है. बुजुर्गों की सलाह में भी चौखट से जुड़ी कई बातें सुनने को मिलती हैं. ऐसी ही एक मान्यता है कि किसी मेहमान या घर के सदस्य को विदा करते समय दरवाजे पर खड़े होकर रोना नहीं चाहिए.
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विदाई के समय चौखट पर रोने या उदास होने को शुभ नहीं माना जाता. इसके पीछे मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मक माहौल बना रहना चाहिए. आइए जानते हैं, इस परंपरा के पीछे क्या वजह बताई जाती है और मुख्य द्वार को लेकर किन बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.
विदाई के समय चौखट पर रोना क्यों माना जाता है अशुभ?
मान्यता के अनुसार घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है. जब कोई व्यक्ति किसी यात्रा या नए काम की शुरुआत के लिए घर से निकलता है, तो इसे नई शुरुआत के तौर पर देखा जाता है.
ऐसे समय में अगर कोई चौखट पर खड़े होकर रोता है या बहुत उदास होता है, तो वहां का वातावरण नकारात्मक हो सकता है. यह भी माना जाता है कि विदाई के वक्त आंसू बहाने से जाने वाले के सफर में बाधाएं आ सकती हैं. इसलिए बुजुर्ग हमेशा विदाई के समय मुस्कुराने और शुभ बातें कहने की सलाह देते हैं.
घर की सुख-शांति पर भी पड़ता है असर
वास्तु मान्यताओं में मुख्य द्वार को घर के माहौल से जोड़कर देखा जाता है. चौखट पर लगातार रोने-धोने या उदासी का माहौल रहने से घर का वातावरण भारी होने की मान्यता है. इससे परिवार के सदस्यों की मानसिक शांति प्रभावित होने की बात कही जाती है.
ऐसा भी माना जाता है कि जिस घर के मुख्य द्वार पर बार-बार उदासी या क्लेश का माहौल रहता है, वहां सुख-समृद्धि में कमी आ सकती है. इसके उलट किसी को खुशी और शुभकामनाओं के साथ विदा करने से सकारात्मक माहौल बना रहता है.
मुख्य द्वार पर गंदगी जमा न होने दें
वास्तु मान्यताओं में घर की दहलीज को विशेष महत्व दिया गया है. इसे मां लक्ष्मी के आगमन से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए मुख्य द्वार और उसके आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी जाती है.
दरवाजे के पास कूड़ा-कचरा या गंदगी जमा नहीं होने देना चाहिए. मान्यता है कि साफ-सुथरा मुख्य द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है.
शाम के समय चौखट पर बैठने से भी बचें
बुजुर्गों की सलाह में शाम के समय घर की चौखट पर बैठने से बचने की बात भी कही जाती है. धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुस्ती और बीमारियां बढ़ सकती हैं.
इसी वजह से मुख्य द्वार को साफ रखने और चौखट को अनावश्यक रूप से रोककर न रखने की सलाह दी जाती है.
चौखट पर खड़े होकर बहस या कड़वी बातें न करें
कई बार घर के सदस्य या दूसरे लोग दरवाजे पर खड़े होकर ही आपस में बहस करने लगते हैं. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर गुस्सा करना, चिल्लाना या कड़वी बातें करना भी उचित नहीं माना जाता.
मान्यता है कि घर के प्रवेश द्वार पर नकारात्मक माहौल रहने से घर की शांति प्रभावित हो सकती है. इसलिए कोशिश की जाती है कि मुख्य द्वार पर बातचीत शांत और सकारात्मक तरीके से हो.
विदाई के समय मुस्कुराकर दें शुभकामनाएं
भारतीय परंपरा में मेहमान को सम्मान देने की परंपरा रही है. जब कोई मेहमान या परिवार का सदस्य घर से विदा हो, तो उसे शुभकामनाओं और सम्मान के साथ विदा करने की सलाह दी जाती है.
बेहतर सफर के लिए शुभकामना देना और मुस्कुराते हुए विदा करना इसी परंपरा का हिस्सा माना जाता है. धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मक माहौल बनाए रखने से परिवार में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है.