लखनऊ: नकली नोटों का कारोबार करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक लाख रुपये की असली करेंसी के बदले ढाई लाख रुपये के नकली नोट देते थे। दोनों के पास से 30 हजार रुपये की नकली करेंसी और मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस अब गिरोह के उस मुख्य सदस्य की तलाश कर रही है, जो दिल्ली में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित करता था।
दिल्ली से हारून चलाता था पूरा नेटवर्क
नाका इंस्पेक्टर विवेक चौधरी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उन्नाव के हसनगंज क्षेत्र के सराय हसनगंज निवासी मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद सुलेमान के रूप में हुई है। दोनों सगे भाई हैं। पुलिस के मुताबिक, उनका चचेरा भाई हारून दिल्ली में रहकर नकली नोटों का नेटवर्क चला रहा था।
जांच में सामने आया है कि हारून ही नकली नोट भेजता था और ग्राहकों से मुलाकात की जगह भी तय करता था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें लगाई हैं।
शर्ट का रंग देखकर होती थी ग्राहक की पहचान
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि ग्राहक से मुलाकात से कुछ समय पहले हारून वाट्सऐप के जरिए उनकी लोकेशन भेजता था। इसके साथ ही ग्राहक की पहचान के लिए उसकी शर्ट का रंग भी बताया जाता था।
इसके बाद दोनों भाई बताए गए स्थान पर पहुंचते थे। वहां ग्राहक की शर्ट का रंग देखकर उसकी पहचान करते और उसके हाथ में नकली नोटों की गड्डी सौंप देते थे।
एक लाख असली लेकर ढाई लाख नकली नोट
पुलिस के मुताबिक, इस सौदे में ग्राहक से एक लाख रुपये की असली रकम ली जाती थी और बदले में उसे ढाई लाख रुपये के नकली नोट दिए जाते थे। ग्राहक से मिली असली रकम में से दोनों भाई अपना कमीशन निकाल लेते थे।
बाकी रकम हारून के बताए क्यूआर कोड पर भेज दी जाती थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे हर सप्ताह करीब दो बार नकली नोटों की डिलीवरी करते थे।
मेट्रो स्टेशन के पास झोपड़पट्टी से पकड़े गए
पुलिस ने दोनों आरोपियों को दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित झोपड़पट्टी से गिरफ्तार किया। उनके पास से नकली करेंसी के अलावा मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि दिल्ली में बैठा हारून नकली नोट कहां से हासिल करता था और अब तक गिरोह कितनी नकली करेंसी बाजार में खपा चुका है।