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Trending Newsवर्ल्ड

कोविड की याद दिला रहा इबोला! कांगो में 7 हजार से ज्यादा केस, 3 हजार मौतें

news desk
Last updated: September 12, 2026 4:05 pm
news desk
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कांगो में एक खतरनाक वायरस ने ऐसी दस्तक दी है, जिसने दुनिया को कोविड-19 के मुश्किल दौर की याद दिला दी है। इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप तेजी से फैल रहा है और अब तक हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक 7,022 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 3,398 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि यह कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है।

Contents
कब से फैल रहा है इबोला वायरस? क्या है इस वायरस की सबसे बड़ी चुनौती?अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कर रही हैं मदद

कब से फैल रहा है इबोला वायरस?

यह प्रकोप कांगो के इतिहास के सबसे बड़े और घातक इबोला प्रकोपों में शामिल हो चुका है। इसने 2018 से 2020 के प्रकोप को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर यह 2014-2016 के पश्चिमी अफ्रीका के प्रकोप के बाद दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बताया जा रहा है, जिसमें 28 हजार से अधिक मामले और 11 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं।

कांगो में मौजूदा प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मई 2026 में इटुरी प्रांत में की गई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण जनवरी से ही फैलना शुरू हो गया था। अब तक यह सात प्रांतों तक पहुंच चुका है।

 क्या है इस वायरस की सबसे बड़ी चुनौती?

बुंडीबुग्यो वायरस जैसे इबोला स्ट्रेन से निपटना बड़ी चुनौती है। इसके खिलाफ प्रमाणित वैक्सीन और विशेष दवा की सीमित उपलब्धता के कारण मरीजों को मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर दी जाती है।इबोला की मृत्यु दर कुछ प्रकोपों में काफी अधिक रही है।

वहीं, संघर्ष प्रभावित और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण संक्रमण पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। शुरुआत में बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, जिससे संक्रमण की पहचान में देरी हो सकती है।

संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी जोखिम बढ़ जाता है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कर रही हैं मदद

इबोला के प्रकोप से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, एमएसएफ और रेड क्रॉस जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मदद कर रही हैं। डब्ल्यूएचओ निगरानी, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जांच व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जबकि यूनिसेफ स्वच्छता किट उपलब्ध कराने और जागरूकता फैलाने में मदद कर रहा है।

एमएसएफ  की टीमें इलाज और आइसोलेशन सेंटरों में मरीजों की देखभाल कर रही हैं। रेड क्रॉस सुरक्षित दफन की व्यवस्था में सहयोग कर रहा है। भारत ने अफ्रीका CDC को चिकित्सा सामग्री और उपकरण भेजे हैं, जबकि अमेरिका स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग और PPE किट की सप्लाई में सहयोग कर रहा है।

कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला प्रकोप सिर्फ एक स्थानीय स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनता जा रहा है। संक्रमण का सात प्रांतों तक पहुंचना, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाएं और नए स्ट्रेन से जुड़ी चुनौतियां स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। हालांकि डब्ल्यूएचओ समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार निगरानी, इलाज और रोकथाम के प्रयास कर रही हैं। ऐसे में समय पर पहचान, संक्रमित लोगों का उचित इलाज और संक्रमण की चेन तोड़ना इस प्रकोप पर काबू पाने के लिए बेहद जरूरी होगा।

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TAGGED: Africa, BundibugyoVirus, Congo, Ebola, EbolaOutbreak, GlobalHealth, HealthCrisis, IndianPressHouse, indianpresshouse news, Trending News, VirusOutbreak
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