एक तरफ सऊदी अरब पर हूतियों का बड़ा हमला और दूसरी तरफ कुछ ही हफ्ते पहले हुआ ऐसा रक्षा समझौता, जिसने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है। 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौता पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक, तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। अब हूतियों के ताजा हमलों में सऊदी अरब में 73 लोग घायल हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है—क्या इस हमले का जवाब सिर्फ सऊदी अरब देगा या तीनों देशों के रक्षा सहयोग की असली परीक्षा अब होने वाली है?
क्यों किया हूतियों ने सऊदी पर हमला?
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले को यमन में सऊदी समर्थित सैन्य कार्रवाई के जवाब के तौर पर पेश किया है। हूतियों का दावा है कि यह उनकी ‘नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी’ नीति का हिस्सा है।
यमन में सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूतियों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। वहीं, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जैसे अहम व्यापारिक मार्ग भी इस टकराव के केंद्र में हैं। सऊदी अरब के अहम हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर हूती सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं।
सऊदी के किन इलाकों को बनाया निशाना?
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक, सैन्य और आर्थिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले करने का दावा किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, हमलों में आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, खमीस मुशैत स्थित किंग खालिद एयर बेस और सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
इन हमलों के बाद आभा, खमीस मुशैत, जिजान और नज्रान समेत कई इलाकों में तनाव बढ़ गया है। हालांकि, हमलों से हुए नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
सउदी अरब ने दिया जवाब
सऊदी अरब ने हूती हमलों को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हमलों से निपटने और भविष्य में ऐसे खतरों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हालिया हमलों में दक्षिणी सऊदी अरब के कई इलाकों में 73 लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ ऊर्जा और आर्थिक ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
सऊदी अरब पर हूती हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। 73 लोगों के घायल होने और ऊर्जा ठिकानों पर असर के बाद सऊदी की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर है।
पाकिस्तान ने हूती हमलों की निंदा करते हुए सऊदी की सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन की बात कही है। वहीं, तुर्किये की भूमिका पर अभी स्पष्ट आधिकारिक बयान का इंतजार है। ऐसे में सऊदी-तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा समझौते की असली परीक्षा आगे हो सकती है।