दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक कच्चे तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इजरायल की चेतावनियों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की घटती आवाजाही से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन के साथ शांति समझौते को लेकर दिए गए संकेतों ने बाजार को कुछ राहत दी। इन परस्पर विरोधी घटनाक्रमों के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब छह हफ्ते के ऊंचे स्तर तक पहुंच गई और बाद में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करती रही।
अमेरिकी हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक हालिया अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत हुई और 108 लोग घायल हुए। रेड क्रेसेंट ने होर्मुज के पास एक शादी समारोह पर हमले की भी जानकारी दी है। इस सैन्य टकराव के बीच ब्रेंट क्रूड 95.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 91.30 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान के वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने तक बातचीत नहीं होगी।
पुतिन के बयान ने दी तेल बाजार को थोड़ी राहत
मध्य पूर्व में तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान से तेल बाजार को कुछ राहत मिली। एक आर्थिक मंच पर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के साथ शांति समझौते की संभावनाएं बन रही हैं और अमेरिका तथा चीन जैसे देश भी इसका समर्थन कर रहे हैं।
बाजार के जानकारों के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध रुकने की स्थिति में रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों का सिलसिला थम सकता है। इससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ेगी। इसी संभावना ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को कुछ हद तक सीमित किया है।
होर्मुज में घट गई जहाजों की आवाजाही
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। मौजूदा तनाव के बीच इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है। जहाजों से जुड़े आंकड़ों के अनुसार बुधवार को केवल छह मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 13 से अधिक जहाज यहां से गुजरते हैं।
ईरान ने कुछ विदेशी जहाजों को काली सूची में डालने के साथ उनकी जब्ती की चेतावनी भी दी है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से मिली छूट के बाद इराक ने अगस्त में अपना तेल निर्यात बढ़ाकर 2.34 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर लिया।
आगे क्या तय करेगा कच्चे तेल की कीमत?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर निर्भर करेगी। अगर सैन्य टकराव बढ़ता है और तेल आपूर्ति पर खतरा गहराता है तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं तनाव कम होने पर बाजार को राहत मिल सकती है।
इजरायल की ओर से ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले की चेतावनी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बने रहने की आशंका है। इसका सीधा असर आगे चलकर ईंधन की कीमतों और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है।
दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के दाम कितने हैं?
कच्चे तेल में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले दिनों कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इसका फायदा घरेलू ईंधन कीमतों में मिल सकता है। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर तेजी आने के बाद पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सोमवार सुबह सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले स्तर पर ही बरकरार रखीं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।