नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द हो गया है। रेवंत रेड्डी को ब्रिटेन जाने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन ब्रिटेन के बाद अमेरिका जाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से Political Clearance नहीं दी गई। इसके बाद उनका अमेरिका दौरा रद्द करना पड़ा और वह यूके से ही भारत लौटेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर किसी मुख्यमंत्री या सरकारी प्रतिनिधि की विदेश यात्रा के लिए Political Clearance क्यों जरूरी होती है और केंद्र सरकार इसे किन आधारों पर मंजूरी देती है?
पहले समझिए क्या है Political Clearance?
किसी मुख्यमंत्री, मंत्री या अन्य सरकारी प्रतिनिधि के आधिकारिक विदेश दौरे से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। विदेश नीति और विदेशी मामलों से जुड़े विषय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए सरकारी विदेश यात्रा के प्रस्ताव का मूल्यांकन विदेश मंत्रालय समेत संबंधित केंद्रीय संस्थाएं करती हैं।
इस प्रक्रिया को आम तौर पर Political Clearance कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रस्तावित यात्रा भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय हितों और संबंधित देश के साथ भारत के संबंधों के अनुरूप हो।
रेवंत रेड्डी को UK की मंजूरी, US पर क्यों लगी रोक?
रेवंत रेड्डी तेलंगाना के प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब 10 दिन के विदेश दौरे पर गए थे। उनके कार्यक्रम में ब्रिटेन की यात्रा शामिल थी, जिसे केंद्र से मंजूरी मिली थी।
इसके बाद उन्हें अमेरिका जाना था, लेकिन इस हिस्से के लिए Political Clearance नहीं मिली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, मुख्यमंत्री और अन्य सरकारी प्रतिनिधियों के विदेशी दौरों का उनके पद और यात्रा के उद्देश्य के आधार पर आकलन किया जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका यात्रा का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पद और दौरे के उद्देश्य के अनुरूप नहीं पाया गया, जबकि ब्रिटेन की यात्रा को इसी आधार पर मंजूरी दी गई थी।
केंद्र सरकार किन बातों को देखती है?
किसी आधिकारिक विदेश दौरे को मंजूरी देने से पहले कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- यात्रा का उद्देश्य क्या है?
- विदेश यात्रा का निमंत्रण किस संस्था या व्यक्ति ने दिया है?
- कार्यक्रम मुख्यमंत्री या मंत्री के पद और जिम्मेदारियों के अनुरूप है या नहीं?
- भारत और संबंधित देश के बीच राजनयिक संबंध कैसे हैं?
- यात्रा से भारत के राजनीतिक, कूटनीतिक या रणनीतिक हितों पर क्या असर पड़ सकता है?
- क्या प्रस्तावित कार्यक्रम भारत की विदेश नीति के अनुरूप है?
इन पहलुओं के मूल्यांकन के बाद सरकार यात्रा को मंजूरी देने या Political Clearance रोकने का फैसला कर सकती है।
क्या निजी विदेश यात्रा के लिए भी यही नियम है?
मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के मंत्री अगर विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, तो उन्हें अपनी यात्रा की जानकारी संबंधित केंद्रीय संस्थाओं को देनी होती है। वहीं, आधिकारिक सरकारी यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय की मंजूरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है।
यानी विदेश यात्रा सिर्फ राज्य सरकार के स्तर पर तय हो जाने से सरकारी प्रतिनिधि के लिए विदेश जाना संभव नहीं हो जाता। केंद्र की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
क्या केंद्र किसी मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा रोक सकता है?
हां, अगर केंद्र सरकार के मूल्यांकन में प्रस्तावित यात्रा संबंधित पद, उद्देश्य या भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो Political Clearance नहीं दी जा सकती।
रेवंत रेड्डी के मामले में भी विदेश मंत्रालय ने यही वजह बताई है। हालांकि, मंत्रालय ने अमेरिका दौरे को मंजूरी न देने के पीछे कोई विस्तृत कूटनीतिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
रेवंत रेड्डी से पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा को लेकर Political Clearance का मुद्दा सामने आया हो। इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की कुछ प्रस्तावित विदेश यात्राओं को भी केंद्र से मंजूरी नहीं मिल पाई थी।
आखिर क्यों अहम है यह मामला?
रेवंत रेड्डी की अमेरिका यात्रा को मंजूरी न मिलने से एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों की विदेश यात्राओं और केंद्र की Political Clearance व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।
हालांकि, रेवंत रेड्डी के मामले में अमेरिका दौरे को मंजूरी न मिलने की वजह पर विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इतना कहा है कि प्रस्तावित यात्रा मुख्यमंत्री के पद और दौरे के अनुरूप नहीं थी।