नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है और इस बार संगठन के इतिहास में बड़ा बदलाव होने की संभावना नजर आ रही है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के करीब 80 साल बाद पहली बार किसी महिला के महासचिव बनने का रास्ता खुलता दिख रहा है। महासचिव पद की दौड़ में शामिल 8 उम्मीदवारों में 5 महिलाएं हैं। दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे निकल गई हैं।
कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट ने दूसरे दौर में मारी बाजी
मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र को नया महासचिव चुनने की प्रक्रिया चल रही है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुए दूसरे दौर के अनौपचारिक मतदान में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। पहले दौर में शीर्ष पर रही कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन इस बार दूसरे स्थान पर रहीं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख और अर्जेंटीना के रहने वाले उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।
दूसरे दौर में कैरोलिन को मिले 8 वोट
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश हैं। इनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। दूसरे दौर की गुप्त वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट को 8 देशों ने समर्थन दिया, जबकि 3 देशों ने उनका विरोध किया और 4 देशों ने कोई राय जाहिर नहीं की।
रेबेका ग्रिन्सपैन को पहले दौर में 10 वोट मिले थे, लेकिन दूसरे दौर में उनका समर्थन घट गया और वह दूसरे स्थान पर पहुंच गईं। हालांकि, यह अनौपचारिक मतदान अंतिम परिणाम नहीं माना जाता। इसका उद्देश्य यह समझना होता है कि किस उम्मीदवार के नाम पर सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच सहमति बनने की संभावना है।
कम समर्थन मिलने वाले उम्मीदवार अक्सर आगे की प्रक्रिया से अपनी दावेदारी वापस ले लेते हैं। इसलिए आने वाले दौर की वोटिंग इस पूरी दौड़ की दिशा तय करने में अहम होगी।
कैसे चुना जाता है UN का महासचिव?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव आम चुनाव की तरह नहीं होता। इसके लिए सुरक्षा परिषद में कई दौर की अनौपचारिक वोटिंग होती है। किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद से सिफारिश हासिल करने के लिए 15 में से कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है।
इसके साथ एक और अहम शर्त है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी को भी उम्मीदवार के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर वीटो शक्ति रखने वाला कोई देश किसी उम्मीदवार का विरोध कर देता है, तो उसकी दावेदारी आगे नहीं बढ़ सकती।
कई दौर की प्रक्रिया के बाद सुरक्षा परिषद किसी एक नाम पर सहमति बनाकर अपनी सिफारिश संयुक्त राष्ट्र महासभा को भेजती है। इसके बाद 193 सदस्यीय महासभा औपचारिक रूप से नए महासचिव की नियुक्ति करती है। महासभा के किसी सदस्य के पास वीटो का अधिकार नहीं होता।
इस बार महिला महासचिव की उम्मीद क्यों बढ़ी?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी। तब से अब तक 9 महासचिव चुने गए हैं और सभी पुरुष रहे हैं। लंबे समय से संगठन की शीर्ष जिम्मेदारी किसी महिला को सौंपने की मांग उठती रही है। इस बार महासचिव पद की दौड़ में 8 में से 5 उम्मीदवारों के महिला होने से इस संभावना को बल मिला है।
लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र की भी बारी
महासचिव के चयन में क्षेत्रीय संतुलन की परंपरा का भी महत्व माना जाता है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को बारी-बारी से यह पद मिलने की परंपरा रही है। इस बार लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र की बारी मानी जा रही है। ऐसे में नए महासचिव का इसी क्षेत्र से चुना जाना संभावित माना जा रहा है।
कैरोलिन के पक्ष में क्या जाता है?
गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट छोटे द्वीपीय देश से आती हैं और विकासशील देशों के समूह जी-77 के प्रतिनिधित्व का लंबा अनुभव रखती हैं। महासचिव पद के लिए ऐसे उम्मीदवारों को भी महत्व दिया जाता है जो किसी एक बड़ी शक्ति के प्रभाव में नजर न आएं।
कैरोलिन का यही पक्ष उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, अभी कई दौर की वोटिंग बाकी है और अंतिम फैसला सुरक्षा परिषद की सहमति के बाद ही होगा। फिलहाल अगले चरण के मतदान की तैयारी चल रही है, जिसके बाद तस्वीर और साफ होगी।