नई दिल्ली: मुंह और जीभ पर बार-बार होने वाले छाले खाने-पीने से लेकर बोलने तक में परेशानी पैदा कर सकते हैं। खानपान में गड़बड़ी, पाचन संबंधी समस्याएं, पोषक तत्वों की कमी और तनाव समेत कई कारणों से यह समस्या हो सकती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर रूपाली जैन के मुताबिक, आयुर्वेद में मुंह के छालों को पित्त दोष के बढ़ने, देर रात तक जागने, बहुत ज्यादा मसालेदार और तली-भुनी चीजें खाने, लंबे समय तक खाली पेट रहने तथा शरीर में दोषों के असंतुलन से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय छालों की जलन और परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं।
बार-बार छाले होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
मुंह में बार-बार या लंबे समय तक छाले होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें विटामिन बी12 की कमी, तनाव, खानपान की गड़बड़ी, पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या और आंतों से संबंधित परेशानी शामिल हैं। आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष का बढ़ना, देर रात तक जागना, बहुत ज्यादा मिर्च-मसालेदार भोजन, तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन, नॉनवेज का ज्यादा सेवन और लंबे समय तक खाली पेट रहना भी मुंह के छालों की समस्या से जुड़ा हो सकता है।
त्रिफला के पानी से कुल्ला करने की सलाह
डॉ. रूपाली जैन के अनुसार, मुंह में छाले होने पर त्रिफला के पानी से कुल्ला किया जा सकता है। इसके लिए रात में एक गिलास पानी में करीब एक चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर रख दें। सुबह इसे उबालें और पानी आधा रह जाने पर छान लें। ठंडा होने के बाद इससे कुल्ला करें और पानी को कुछ देर मुंह में रखकर बाहर निकाल दें। कुल्ला करते समय पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे छालों की जलन बढ़ सकती है।
हल्दी के पानी से भी कर सकते हैं कुल्ला
छालों की परेशानी में हल्दी के पानी से कुल्ला करने की भी सलाह दी गई है। इसके लिए एक गिलास पानी में थोड़ी हल्दी डालकर उबालें और पानी करीब आधा रह जाने पर उसे छान लें। सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हल्दी में सूजनरोधी और कुछ रोगाणुरोधी गुण पाए जाते हैं, जो मुंह की जलन में राहत देने में मदद कर सकते हैं।
नारियल तेल से ऑयल पुलिंग
डॉ. जैन ने मुंह की सफाई के लिए नारियल तेल से ऑयल पुलिंग का भी सुझाव दिया है। इसके लिए करीब 15 से 20 मिलीलीटर कोल्ड-प्रेस्ड नारियल तेल को हल्का गुनगुना कर मुंह में रखें और कुछ मिनट तक घुमाएं। इसके बाद तेल को निगलने के बजाय बाहर निकाल दें और पानी से मुंह साफ कर लें। छोटे बच्चों में यह तरीका नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि तेल के गलती से सांस की नली में जाने का खतरा हो सकता है।
घी और मुलेठी से छाले पर लगाने का उपाय
मुंह के छालों पर गाय के घी के साथ मुलेठी का चूर्ण मिलाकर लगाने की सलाह भी दी गई है। मुलेठी को आयुर्वेद में यष्टिमधु के नाम से जाना जाता है। इसे छाले वाली जगह पर लगाया जा सकता है।
शहद और हल्दी का इस्तेमाल
मुलेठी का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो शहद में हल्दी मिलाकर छाले पर लगाने की सलाह दी गई है। हालांकि, एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को भी शहद के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
धनिए का पानी भी आजमा सकते हैं
मुंह के छालों के लिए धनिए के पानी को भी घरेलू उपाय के तौर पर बताया गया है। इसके लिए करीब एक चम्मच साबुत धनिए को हल्का दरदरा कूटकर दो कप पानी में रातभर भिगोकर रखें। सुबह इसे छान लें और सामान्य तापमान पर आने के बाद पी सकते हैं। स्वाद के लिए इसमें थोड़ी मिश्री मिलाई जा सकती है। आयुर्वेद में धनिए को पित्त शांत करने वाला माना जाता है।
आंवला खाने से भी मिल सकता है फायदा
डॉ. जैन के मुताबिक, आंवले का सेवन भी किया जा सकता है। इसे चूर्ण, मुरब्बे या अन्य रूप में लिया जा सकता है। आंवला विटामिन सी और दूसरे पोषक तत्वों का स्रोत है। हालांकि, अगर खट्टे खाद्य पदार्थ खाने से छालों में जलन बढ़ती है तो आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए।
प्रवाल पिष्टी और गुलकंद का भी जिक्र
मुंह के छालों से राहत के लिए डॉ. जैन ने दो चुटकी प्रवाल पिष्टी को आधा चम्मच गुलकंद के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी है। आयुर्वेद में इसे पित्त को शांत करने से जोड़ा जाता है। हालांकि, प्रवाल पिष्टी जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
मुनक्का भिगोकर खाने की सलाह
पित्त को कम करने वाले घरेलू उपाय के तौर पर रात में कुछ मुनक्के पानी में भिगोकर रखने और सुबह उन्हें अच्छी तरह चबाकर खाने की सलाह दी गई है। इसके बाद बचा हुआ पानी भी पिया जा सकता है। मुनक्का फाइबर और प्राकृतिक शर्करा का स्रोत है, इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
अगर मुंह में छाले बहुत ज्यादा हो गए हैं, लंबे समय तक बने हुए हैं या बार-बार होने की समस्या है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।