नई दिल्ली। प्रियंका चोपड़ा और मानुषी छिल्लर के बाद अब भारत की एक और बेटी वैश्विक मंच पर देश का परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्य प्रदेश से पहली फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड बनीं निकिता पोरवाल (Nikita Porwal) मिस वर्ल्ड 2026 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं।
तैयारियों के इस दौर में निकिता न सिर्फ रैम्प वॉक और ग्रूमिंग, बल्कि अपने विचारों और समाज सेवा के जरिए भी भारत की वास्तविक पहचान दुनिया के सामने रखने की कोशिश में जुटी हैं। हाल ही में एक विशेष बातचीत के दौरान निकिता ने अपनी दो साल की कठिन ट्रेनिंग, डाइट रूटीन, प्रेरणा और अपने खास ब्यूटी विद अ पर्पस प्रोजेक्ट के बारे में खुलकर चर्चा की।
1. मध्य प्रदेश से वैश्विक मंच तक: 2 साल की कड़ी मेहनत और ट्रांसफॉर्मेशन
मध्य प्रदेश के एक साधारण परिवार से निकलकर मिस इंडिया बनने तक का सफर निकिता के लिए आसान नहीं था। पिछले दो सालों में उन्होंने फिटनेस, कम्युनिकेशन, मीडिया ट्रेनिंग, वॉइस मॉड्यूलेशन और फैशन ग्रूमिंग पर विशेषज्ञों की टीम के साथ दिन-रात काम किया है।
निकिता का कहना है, “जब आप अपने नाम के साथ ‘India’ का सैश पहनते हैं, तो वह केवल एक नाम नहीं, बल्कि 140 करोड़ लोगों का विश्वास होता है। इन दो सालों में मैंने सीखा कि असली बदलाव बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर आत्मविश्वास और अनुशासन से आता है।”
2. ऐश्वर्या राय और प्रियंका चोपड़ा को मानती हैं अपनी रोल मॉडल
मिस वर्ल्ड के मंच पर उतरने से पहले निकिता भारत की पूर्व विजेताओं से प्रेरणा ले रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐश्वर्या राय की गरिमा और भारतीय संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का तरीका अभूतपूर्व था, वहीं प्रियंका चोपड़ा ने साबित किया कि एक भारतीय महिला दुनिया के किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है। निकिता भी इन्हीं पदचिह्नों पर चलते हुए एक उद्देश्यपूर्ण पहचान बनाना चाहती हैं।
3. ‘MAATI’ प्रोजेक्ट: आदिवासी महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण की नई पहल
मिस वर्ल्ड के बेहद महत्वपूर्ण खंड ‘ब्यूटी विद अ पर्पस’ (Beauty with a Purpose) के लिए निकिता ‘MAATI’ नाम से एक खास प्रोजेक्ट चला रही हैं।
- लक्ष्य: आदिवासी महिलाओं और बच्चों को उनकी मूल संस्कृति को नुकसान पहुँचाए बिना बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना।
- सोच: निकिता का मानना है कि वास्तविक सशक्तिकरण किसी की पहचान बदलना नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाना है।
4. ब्यूटी पेजेंट्स के रूढ़िवादी स्टीरियोटाइप्स को कर रहीं ध्वस्त
समाज में आज भी ब्यूटी पेजेंट्स को केवल रंग, कद और शारीरिक सुंदरता से जोड़कर देखा जाता है। इस पर निकिता ने स्पष्ट कहा कि आज यह मंच सोच, संवेदनशीलता और सामाजिक योगदान को प्राथमिकता देता है। इंसान की असली पहचान चेहरे से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और उद्देश्य से बनती है।
5. रंगमंच पर निभा चुकी हैं ‘माता सीता’ का किरदार
मॉडलिंग के साथ-साथ निकिता का जुड़ाव थिएटर से भी रहा है। रंगमंच पर वे माता सीता का किरदार निभा चुकी हैं। उनका कहना है कि अगर भविष्य में पौराणिक या ऐतिहासिक फिल्मों का मौका मिला, तो वे फिर से माता सीता की भूमिका निभाना चाहेंगी, क्योंकि उनके चरित्र में धैर्य, करुणा, शक्ति और गरिमा का अद्वितीय संगम है।
6. Gen-Z को खास संदेश: ‘परफेक्शन’ नहीं, अपनी ‘असलियत’ को अपनाएं
सोशल मीडिया पर लगातार ग्लैमरस दिखने के दबाव पर निकिता ने आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) को एक अहम सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया किसी की पूरी जिंदगी नहीं, सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा दिखाता है। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी वास्तविक यात्रा पर ध्यान दें, क्योंकि दुनिया को किसी की परफेक्ट तस्वीर नहीं, बल्कि उसका सच्चा व्यक्तित्व याद रहता है।