नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी क्रोनिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग प्राकृतिक उपायों की ओर भी रुख कर रहे हैं। आयुर्वेद में दालचीनी को औषधीय गुणों से भरपूर मसाला माना गया है। आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है।
दालचीनी क्यों मानी जाती है फायदेमंद?
दालचीनी एक सुगंधित मसाला है, जिसका उपयोग लंबे समय से भोजन के स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है। इसमें पॉलीफेनॉल जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने में सहायक माने जाते हैं।
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में कैसे करती है मदद?
डॉ. सलीम जैदी के मुताबिक कई शोधों में पाया गया है कि दालचीनी कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है। वहीं, एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। कुछ लोगों में यह रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक हो सकती है। हालांकि इसे हृदय रोग की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
डायबिटीज के मरीजों के लिए क्या है फायदा?
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार दालचीनी शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है, विशेष रूप से टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में। यह कार्बोहाइड्रेट के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण की प्रक्रिया को भी धीमा कर सकती है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति पहले से डायबिटीज की दवा ले रहा है तो नियमित रूप से दालचीनी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
दालचीनी के अन्य संभावित फायदे
कई शोधों में यह भी सामने आया है कि दालचीनी मस्तिष्क की कोशिकाओं की सुरक्षा में सहायक हो सकती है। अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों पर इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन जारी है। कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि धीमी करने की संभावना भी देखी गई है, हालांकि इसे कैंसर के उपचार या रोकथाम का प्रमाणित उपाय नहीं माना जा सकता।
दालचीनी में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी पाए जाते हैं। कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि यह मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार कर वजन नियंत्रित रखने में सहायक हो सकती है। हालांकि केवल दालचीनी खाने से वजन कम नहीं होता, इसके लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
दालचीनी का सेवन कैसे करें?
दालचीनी को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी का सेवन किया जा सकता है। इसे चाय या दूध में मिलाकर भी पिया जा सकता है। इसके अलावा सब्जियों, दलिया, ओट्स या अन्य भोजन में सीमित मात्रा में दालचीनी पाउडर मिलाकर भी खाया जा सकता है। सामान्य तौर पर प्रतिदिन 3 से 6 ग्राम तक दालचीनी का सेवन सुरक्षित माना जाता है।
अधिक सेवन से हो सकते हैं नुकसान
दालचीनी का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में लिवर पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इससे मुंह या गले में जलन, एलर्जी और ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में और आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। दालचीनी को किसी भी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।