देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल “E20 Fuel” को लेकर चल रही बहसों के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक नया मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में E20 ईंधन के मुद्दे पर आयोजित एक टाउन हॉल बैठक को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने तेवर कड़े कर दिए। उन्होंने साफ शब्दों में ऐलान किया कि वह इस मुद्दे को लेकर आने वाले मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करेंगे।
केजरीवाल ने इस शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए एक अनोखी शर्त भी रखी है। उन्होंने कहा कि उनके साथ ज्ञापन सौंपने के लिए केवल वही 100 लोग PM आवास (लोक कल्याण मार्ग) की तरफ कूच करेंगे, जो पुलिस के डंडे खाने और जेल जाने से बिल्कुल नहीं डरते। हस्ताक्षर अभियान के तहत जुटाए गए लोगों के ज्ञापनों को लेकर वह सीधे प्रधानमंत्री तक जनता की आवाज पहुंचाना चाहते हैं। इस घोषणा के बाद से ही राजधानी के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी बढ़ गई है।
इस पूरे विरोध-प्रदर्शन के केंद्र में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। केजरीवाल की पहली मांग यह है कि पेट्रोल पंपों पर चालकों को बाध्य न किया जाए, बल्कि उन्हें E20 पेट्रोल और नॉर्मल पेट्रोल के बीच चुनने का विकल्प दिया जाए। दूसरी मांग में उन्होंने E20 ईंधन की महंगी दरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इसमें इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो इसकी कीमतें शुद्ध पेट्रोल से काफी कम होनी चाहिए और ईंधन के कुल दामों में कटौती की जानी चाहिए।
केजरीवाल की तीसरी और सबसे अहम मांग उस रिसर्च रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की है, जिसके दम पर केंद्र सरकार यह दावा कर रही है कि E20 से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। केजरीवाल का आरोप है कि सरकार किसी भी तरह की ठोस स्टडी या रिसर्च डेटा को सामने लाए बिना ही सिर्फ बातें बना रही है। उन्होंने दावा किया कि वाहनों के इंजन खराब होने से आम नागरिकों का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए कोई रोडमैप मौजूद नहीं है।
केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश के नागरिकों पर बिना तैयारी के इथेनॉल थोपा जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार बिना व्यापक जांच के केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी दबाव के तहत इस पॉलिसी को जल्दबाजी में लागू कर रही है। टाउन हॉल में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने तंज कसा कि सरकार को देश की जनता के पैसों और गाड़ियों की सुरक्षा से ज्यादा विदेशी आर्थिक हितों की चिंता है।
एक तरफ जहां सरकार ग्रीन एनर्जी और इथेनॉल ब्लेंडिंग को पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बता रही है, वहीं केजरीवाल का यह मार्च सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर जनता के संशय को और गहरा कर सकता है। अब देखना यह होगा कि मंगलवार को होने वाले इस मार्च पर प्रशासन का क्या रुख रहता है।